Patna News: मिडिल ईस्ट की जंग का बिहार पर वार, पटना में उद्योग ठप होने की कगार पर, महंगाई से आम आदमी बेहाल

Patna News:मध्यपूर्व में बीते करीब पंद्रह दिनों से जारी जंग का असर अब हजारों किलोमीटर दूर बिहार की राजधानी पटना तक महसूस होने लगा है।

Middle East War Hits Bihar Patna Industry Near Halt Prices S
महंगाई से आम आदमी बेहाल- फोटो : X

Patna News:मध्यपूर्व में बीते करीब पंद्रह दिनों से जारी जंग का असर अब हजारों किलोमीटर दूर बिहार की राजधानी पटना तक महसूस होने लगा है। सियासी और अंतरराष्ट्रीय टकराव की आंच अब सीधे आम लोगों की जेब और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रही है। बाजार में कई जरूरी चीजों के दाम तेजी से बढ़ने लगे हैं, जबकि कारोबारी इसे गैस और कच्चे माल की आपूर्ति लड़खड़ाने का नतीजा बता रहे हैं।

हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि हालात इतने खराब नहीं हैं और लोगों को अफवाहों के जाल में फंसकर घबराहट में खरीदारी करने से बचना चाहिए। इसके बावजूद बाजारों में बेचैनी का माहौल है। खाने-पीने की वस्तुओं से लेकर प्लास्टिक और केमिकल उत्पादों तक, कई सामानों की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है।

पटना के औद्योगिक इलाकों में इस संकट का असर और भी ज्यादा दिखाई दे रहा है। पटना सिटी के प्लास्टिक उद्योग इस वक्त सबसे ज्यादा मुश्किल में हैं। प्लास्टिक दाने यानी कच्चे माल की आपूर्ति कम होने से कई फैक्ट्रियां बंद होने के कगार पर पहुंच गई हैं। वहीं फतुहा के स्टील उद्योग में उत्पादन करीब 50 फीसदी तक गिर गया है। इसका सीधा असर वहां काम करने वाले मजदूरों की रोजी-रोटी पर पड़ा है, जिन्हें अब पूरी मजदूरी भी नहीं मिल पा रही है।

कारोबारियों का कहना है कि पिछले एक सप्ताह के भीतर ही प्लास्टिक दानों की कीमतों में 30 से 40 फीसदी तक उछाल आया है। पहले जो दाना करीब 125 रुपये प्रति किलो मिलता था, वह अब बढ़कर 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। कारोबारियों का आरोप है कि बाहर से माल नहीं आने और कुछ जगहों पर कालाबाजारी के चलते कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। कई कंपनियों ने तो फिलहाल माल की सप्लाई रोक भी दी है।

इसका असर रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले सामानों पर भी पड़ने लगा है। पटना सिटी में बनने वाली प्लास्टिक की कुर्सी, बाल्टी, मग, कंघी, चश्मा, डब्बा और कैरीबैग जैसे उत्पादों के कारखानों में उत्पादन ठप होने का खतरा मंडरा रहा है।

युद्ध का असर सिर्फ प्लास्टिक उद्योग तक सीमित नहीं है। पेट्रोलियम आधारित केमिकल की कीमतों में भी तेज उछाल आया है। साबुन और क्रीम में इस्तेमाल होने वाला ग्लिसरीन जो पहले करीब 90 रुपये प्रति लीटर था, अब बढ़कर 180 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। पेट्रोलियम जेली, फिनाइल तेल और बोरिक पाउडर जैसे कई केमिकल की सप्लाई बाधित होने से इनके दामों में 20 से 25 फीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

कारोबारियों की मानें तो अगर जंग का यह सिलसिला एक हफ्ता और जारी रहा, तो कई छोटे-बड़े उद्योगों में ताला लग सकता है। ऐसे में यह अंतरराष्ट्रीय संघर्ष बिहार की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर भारी पड़ सकता है।