मंत्री संतोष कुमार सुमन ने राहुल गांधी पर किया तीखा हमला, कहा- विदेश यात्राओं से आगे नहीं बढ़ पाती राजनीति, हार मिलने पर संवैधानिक संस्थाओं को ठहराते हैं जिम्मेदार
Bihar Politics : हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (सेकुलर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है।
PATNA : हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (से.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल गांधी फ्रेश होने कहाँ गए हैं, यह तो वही जानें, लेकिन भारतीय राजनीति में उनकी सक्रियता से ज्यादा चर्चा उनकी विदेश यात्राओं को लेकर होती है। दशहरा बीत गया, लेकिन भारतीय संस्कृति, परंपराओं और जनआस्था से जुड़ाव को लेकर उनकी ओर से कोई खास संदेश सामने नहीं आया।
उन्होंने कहा की भारत केवल चुनाव जीतने का भूगोल नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और करोड़ों लोगों की भावनाओं से निर्मित राष्ट्र है। देश की जनता का विश्वास जीतने की इच्छा रखने वाले नेताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे देश की सांस्कृतिक विरासत और जनभावनाओं को भी समझें। डॉ. सुमन ने कहा कि राहुल गांधी की राजनीति में विदेश यात्राओं, बड़े-बड़े भाषणों और सरकार पर सवाल उठाने की चर्चा तो खूब होती है, लेकिन देश की समस्याओं के समाधान को लेकर उनकी ठोस कार्ययोजना कम दिखाई देती है।
उन्होंने कहा की लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार ही नहीं, जिम्मेदारी भी है, लेकिन हर उपलब्धि में खोट निकालना और हर मुद्दे पर टकराव खड़ा करना जिम्मेदार विपक्ष की पहचान नहीं हो सकती। देश को केवल आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि रोजगार, विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और गरीबों के उत्थान जैसे विषयों पर स्पष्ट दृष्टि एवं व्यावहारिक समाधान चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि चुनाव में मनमाफिक परिणाम नहीं आने पर ईवीएम, चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना राजनीतिक जिम्मेदारी से बचने का रास्ता नहीं हो सकता। राहुल गांधी को समझना चाहिए कि लोकतंत्र में जनादेश का सम्मान करना उतना ही जरूरी है, जितना सरकार की आलोचना करना। जीत मिलने पर चुनाव प्रक्रिया को सही और हार मिलने पर पूरी व्यवस्था को कठघरे में खड़ा करना दोहरा मापदंड है।
मंत्री संतोष कुमार सुमन ने कहा की यदि वोट चोरी के आरोप हैं, तो उन्हें ठोस प्रमाणों के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए। लोकतंत्र आरोपों से नहीं, तथ्यों, पारदर्शिता और जनता के विश्वास से मजबूत होता है। राहुल गांधी को संस्थाओं पर सवाल उठाने के साथ-साथ आत्ममंथन भी करना चाहिए कि आखिर जनता का विश्वास जीतने में उनकी राजनीति बार-बार क्यों पिछड़ जाती है।