Bihar News : मंत्री संतोष सुमन ने तेजस्वी पर किया तीखा हमला, कहा—बांकीपुर में लोकतंत्र का महापर्व और 'बांकेलाल' विदेश में, हार के बाद EVM पर फोड़ेंगे ठीकरा
Bihar News : बिहार सरकार के मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की विदेश यात्रा पर तीखा तंज कसा है........पढ़िए आगे
PATNA : हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार सरकार के मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की विदेश यात्रा पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने कहा कि एक तरफ बांकीपुर की जनता लोकतंत्र का महापर्व मना रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष के मुख्य नेता विदेश भ्रमण का आनंद ले रहे हैं। मंत्री ने आरोप लगाया कि चुनाव के समय जनता के बीच रहने का साहस इनमें नहीं है, लेकिन चुनावी परिणाम आने के बाद ईवीएम, चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने की इनकी पूरी तैयारी है। यही इनकी राजनीति का स्थायी चरित्र बन चुका है।
डॉ. संतोष कुमार सुमन ने कहा कि जो लोग राजनीति को अपनी खानदानी जागीर और आम जनता को अपनी निजी संपत्ति समझते हैं, उन्हें अपनी इस सोच को बदलने की सख्त जरूरत है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसे नेताओं को लगता है कि एयरपोर्ट, लग्जरी रिसॉर्ट और विदेशी नौकायन के सहारे चुनाव जीते जा सकते हैं। उन्हें यह अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि लोकतंत्र में सत्ता कभी भी 'टेबल पॉलिटिक्स' से हासिल नहीं होती, बल्कि इसके लिए जनता का विश्वास और जमीनी कार्यकर्ताओं के पसीने की जरूरत होती है।
मंत्री ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का पद लोकतंत्र की गरिमा का प्रतीक होता है। जननायक कर्पूरी ठाकुर जैसे महान नेताओं ने इस पद की मर्यादा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने भी विपक्ष में रहते हुए हमेशा एक जिम्मेदार भूमिका निभाई। लेकिन आज के नेता प्रतिपक्ष का यह हाल है कि वे ऐन चुनाव के समय जनता से दूर हैं और विदेश यात्राओं में व्यस्त हैं, जो कि बिहार के लोकतंत्र के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने आगे कहा कि बांकीपुर की जनता जागरूक है और वह इस वीआईपी संस्कृति तथा जिम्मेदारी से भागने वाले रवैये को साफ देख रही है। सुमन ने विपक्षी खेमे को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जो लोग अभी से अपनी हार का बहाना तैयार रख रहे हैं, उन्हें यह जान लेना चाहिए कि लोकतंत्र में जनता ही अंतिम निर्णायक होती है। चुनाव में जनता का फैसला चाहे जो भी हो, उसे पूरे साहस के साथ स्वीकार करना ही सच्चे लोकतंत्र की असली पहचान है, न कि हर हार का ठीकरा ईवीएम और संवैधानिक संस्थाओं के सिर पर फोड़कर उन्हें कटघरे में खड़ा करना।