पटना हाईकोर्ट का फैसला: दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह के बाद अब दोनों भतीजों को मिली अग्रिम जमानत

Mokama MLA Anant Singh nephews granted bail by the Patna Hig
अनंत सिंह के दो भतीजों, राजवीर और कर्मवीर को अग्रिम जमानत- फोटो : news 4 nation

मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह के परिवार के लिए राहत भरी खबर आई है  पटना हाईकोर्ट ने बहुचर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह के दो भतीजों, राजवीर और कर्मवीर को अग्रिम जमानत (Anticipatory Bell) दे दी है। इससे पहले निचली अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जस्टिस प्रभात कुमार सिंह की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए दोनों को राहत प्रदान की, हालांकि स्पष्ट किया गया है कि निचली अदालत में मुकदमा अपनी गति से चलता रहेगा।

सियासी विरासत सौंपने की तैयारी में 'छोटे सरकार'

यह कानूनी राहत ऐसे समय में आई है जब अनंत सिंह ने सक्रिय राजनीति से एक कदम पीछे हटने और अपनी विरासत अगली पीढ़ी को सौंपने का स्पष्ट संकेत दे दिया है। उन्होंने हाल ही में ऐलान किया था कि वे खुद अब विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, बल्कि उनके 'बाल-बच्चे' (बेटे) चुनावी मैदान में उतरेंगे। अपने बेटों को सियासी जमीन तैयार करके देने से पहले परिवार के सदस्यों और करीबियों का कानूनी पचड़ों से बाहर आना अनंत सिंह के लिए रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भतीजों की भूमिका और कानूनी पेच

दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह के साथ-साथ उनके भतीजों राजवीर और कर्मवीर को भी आरोपी बनाया गया था। इसी मामले में अनंत सिंह को पहले ही नियमित जमानत मिल चुकी है और वे जेल से बाहर हैं। अब उनके दोनों भतीजों को भी गिरफ्तारी से सुरक्षा मिल जाने के बाद, मोकामा और आसपास के क्षेत्रों में उनके समर्थकों के बीच उत्साह देखा जा रहा है। बचाव पक्ष के वकीलों का तर्क था कि जब मुख्य आरोपी को नियमित जमानत मिल चुकी है, तो सह-आरोपियों को भी राहत मिलनी चाहिए।

2026 के चुनावों पर टिकी नजरें

अनंत सिंह के कुनबे को मिली इस राहत के बड़े राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। बिहार की राजनीति में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए अनंत सिंह को अपने वफादार कुनबे और मजबूत पारिवारिक तंत्र की जरूरत है। अब जब उनके भतीजे भी कानूनी राहत पा चुके हैं, तो माना जा रहा है कि वे अपने बेटों के चुनाव प्रचार और क्षेत्र में संगठन को मजबूत करने में पूरी ताकत झोंक पाएंगे। विरोधियों के लिए यह घटनाक्रम एक नई चुनौती पेश कर सकता है, क्योंकि अनंत सिंह का खेमा अब पूरी तरह से चुनावी मोड में नजर आ रहा है।