RJD से बगावत के बाद ‘गुरु’ से मिले मृत्युंजय तिवारी, अब इनसे मिलकर लालू यादव संग रहने पर लेंगे अंतिम फैसला

राजनीतिक हलकों में यह भी कहा जाता है कि अब्दुल बारी सिद्दीकी की पहल पर ही वर्ष 2006 में मृत्युंजय तिवारी RJD से जुड़े थे। ऐसे में सिद्दीकी के साथ उनकी मुलाकात को बेहद खास माना जा रहा है जिससे राजद में तिवारी के बने रहने पर बड़ा फैसला संभव है

Mrityunjay Tiwari Meets Abdul Bari Siddiqui
Mrityunjay Tiwari Meets Abdul Bari Siddiqui- फोटो : news4nation

Mrityunjay Tiwari : राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में वरिष्ठ नेता और पार्टी के प्रमुख ब्राह्मण चेहरों में शामिल मृत्युंजय तिवारी के इस्तीफे के बाद बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है। पार्टी छोड़ने का ऐलान करने के बाद तिवारी ने शुक्रवार को RJD के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद अब उनके इस्तीफे को लेकर एक नई राजनीतिक तस्वीर सामने आई है। अब्दुल बारी सिद्दीकी ने मुलाकात की पुष्टि करते हुए कहा कि मृत्युंजय तिवारी उनसे मिलने आए थे और उन्होंने अपनी बात रखी। 


सिद्दीकी ने कहा कि उन्होंने तिवारी को समझाया है कि वे अपनी बात पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के सामने रखें। उन्होंने यह भी कहा कि तिवारी जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेंगे और देर शाम लालू प्रसाद यादव से मुलाकात करने का आश्वासन दिया है। सिद्दीकी के मुताबिक, बातचीत के बाद उन्हें उम्मीद है कि मृत्युंजय तिवारी सही फैसला लेंगे। ऐसे में अब यह संभावना भी बन गई है कि तिवारी का RJD छोड़ने का फैसला अंतिम न हो। हालांकि, उनके इस्तीफे को लेकर पार्टी की ओर से औपचारिक स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है।


पहले इस्तीफा, फिर सिद्दीकी से मुलाकात

मृत्युंजय तिवारी ने 16 जुलाई को RJD से इस्तीफा देने का ऐलान किया था। उन्होंने पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से अलग होने की बात कही। इस्तीफे के पीछे उन्होंने पार्टी में समर्पित और पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा, अपमान और आंतरिक कामकाज को लेकर नाराजगी जताई। तिवारी ने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा था कि लंबे समय तक पार्टी के लिए समर्पित रहने वाले कार्यकर्ताओं के लिए अब जगह नहीं बची है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर कुछ ऐसे लोग सक्रिय हैं, जो संगठन को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने अपनी नाराजगी पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाने की बात भी कही थी।


इस्तीफे के बाद अब्दुल बारी सिद्दीकी से उनकी मुलाकात इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि तिवारी को लंबे समय से सिद्दीकी के करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है। राजनीतिक हलकों में यह भी कहा जाता है कि अब्दुल बारी सिद्दीकी की पहल पर ही वर्ष 2006 में मृत्युंजय तिवारी RJD से जुड़े थे। ऐसे में सिद्दीकी के साथ उनकी मुलाकात को पार्टी में उन्हें रोकने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।


कौन हैं मृत्युंजय तिवारी?

मृत्युंजय तिवारी RJD के उन नेताओं में रहे हैं, जिन्होंने लंबे समय तक पार्टी का पक्ष मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर मजबूती से रखा। वे पार्टी के प्रमुख ब्राह्मण चेहरों में गिने जाते हैं और लंबे समय से लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व वाली पार्टी से जुड़े रहे हैं। वर्ष 2006 में RJD से जुड़ने के बाद उन्होंने संगठन में लगातार काम किया। पार्टी के कठिन दौर में भी वे RJD के पक्ष में मुखर रहे। वर्ष 2014 में लालू प्रसाद यादव ने उन्हें पार्टी के प्रवक्ता और मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी दी थी। इसके बाद वे RJD के सबसे सक्रिय और प्रमुख मीडिया चेहरों में शामिल हो गए।


मृत्युंजय तिवारी को पार्टी की विचारधारा और लालू परिवार का खुलकर बचाव करने वाले नेताओं में माना जाता रहा है। चुनावों और राजनीतिक संकट के दौरान वे RJD के सबसे अधिक दिखाई देने वाले प्रवक्ताओं में शामिल रहे। यही वजह है कि उनके इस्तीफे को पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।


क्या RJD में वापस लौटेंगे तिवारी?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मृत्युंजय तिवारी अपने इस्तीफे के फैसले पर कायम रहेंगे या लालू प्रसाद यादव से मुलाकात के बाद अपना फैसला बदल सकते हैं। अब्दुल बारी सिद्दीकी ने जिस तरह कहा है कि तिवारी जल्दबाजी में निर्णय नहीं लेंगे और लालू यादव से मिलने वाले हैं, उससे RJD छोड़ने के फैसले पर सस्पेंस बढ़ गया है।


अगर लालू प्रसाद यादव से मुलाकात के बाद तिवारी अपना फैसला वापस लेते हैं तो यह RJD नेतृत्व के लिए राहत की खबर होगी। वहीं, अगर वे अपने इस्तीफे पर कायम रहते हैं तो यह पार्टी के एक प्रमुख सवर्ण और ब्राह्मण चेहरे के अलग होने के रूप में देखा जाएगा। खासकर ऐसे समय में जब बिहार की राजनीति में आगामी बांकीपुर उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं।
रंजन की रिपोर्ट