Bihar News : नीतीश के चारों सदन में जाने का ‘सपना’ हुआ साकार, लेकिन अनंत ने राजनीति का किया ‘अंत’ और त्यागी ने ‘त्यागा’ जदयू

Bihar News : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चारों सदन में जाने का सपना भले साकार हो गया. लेकिन विधायक अनंत सिंह ने जहाँ अपनीराजनीति के समापन करने का अंत का ऐलान कर दिया. वहीँ केसी त्यागी ने......पढ़िए आगे

Bihar News : नीतीश के चारों सदन में जाने का ‘सपना’ हुआ साकार
सियासत में एक युग का अंत - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : जनता दल (यूनाइटेड) के भीतर एक बड़े राजनीतिक अध्याय का अंत होता दिख रहा है। पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व सांसद के.सी. त्यागी ने जेडीयू की प्राथमिक सदस्यता का नवीनीकरण (रिन्यू) न करने का फैसला लेकर सबको चौंका दिया है। त्यागी का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पद छोड़कर राज्यसभा जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं। जेडीयू के शुरुआती दौर से जुड़े रहे त्यागी का अलग होना पार्टी के लिए एक बड़ा वैचारिक झटका माना जा रहा है।

क्या बोले शिवानंद 

राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने बताया था की केसी त्यागी नीतीश जी के आशिक़ हैं। लेकिन यह एक तरफा मोहब्बत की तरह है। एक वक़्त था जब नीतीश कुमार की बात केसी के ही मुँह से निकला करती थी। पत्रकारों को कोई संशय होता था तो वे केसी को ही फोन लगाते थे। दोस्त परस्त हैं केसी। 77 से ही हमलोगों की मुलाक़ात है। संसद के केंद्रीय हॉल में केसी कभी अकेले नहीं दिखाई देते थे। उनकी शेरों शायरी और पुराने क़िस्सों को सुनने के लिए दो चार लोग तो ज़रूर उनको घेरे रहते थे। सुनाने का उनका अंदाज़ भी ख़ास होता था। तिवारी कहते हैं की हम दोनों एक-दूसरे के प्रशंसक हैं। लेकिन नीतीश कुमार भी तो ख़ास ढाँचे में बने हुए हैं। हमको पार्टी से निकालना हुआ तो उसकी चिट्ठी केसी से ही निकलवाई। बचपन में कहावत सुनते थे. जो तेज होता था. अच्छा लिखता बोलता था तो वैसों के लिए एक मुहावरे का इस्तेमाल होता था। 'कलम तोड़ स्याही' पी जाना. ताकि दूसरा कोई वैसा नहीं लिख पाए। याद है एक मर्तबा केसी ने नीतीश जी के लिए कहा था "जैसे हवा को कोई मुट्ठी में बंद नहीं कर सकता, जैसे फूलों की सुगंध को कोई फैलने से नहीं रोक सकता, वैसे ही नीतीश कुमार के सुशासन और उनके विचारों की गूंज को बिहार की सीमाओं में कैद नहीं किया जा सकता।" मैंने इसको नोट कर लिया था। यह उन दिनों की बात है जब नीतीश कुमार की क़ाबिलियत प्रधानमंत्री के रूप में दर्शाई जा रही थी। इसलिए केसी के उस लाजवाब कसीदे पर ताली बजी थी। लेकिन भारत रत्न वाली बात हज़म नहीं हुई। पता नहीं क्यों नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की बात केसी ने क्यों उठाई ? कहीं नीतीश जी को भारत रत्न का पात्र बता कर केसी त्यागी ने उन पर व्यंग्य तो नहीं किया है ! यह तो वही बता सकते हैं। लेकिन केसी के लिए जिस दुरदुराने वाली भाषा का इस्तेमाल किया गया। वह मुझे अच्छा नहीं लगा। 

पार्टी के गठन से अब तक का सफर

30 अक्टूबर 2003 को समता पार्टी और जनता दल के विलय से बनी जेडीयू के के.सी. त्यागी संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं। उन्होंने जॉर्ज फर्नांडीस के साथ महासचिव के रूप में काम किया और बाद में शरद यादव व नीतीश कुमार के कार्यकाल में मुख्य महासचिव, मुख्य प्रवक्ता और राजनीतिक सलाहकार जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। पार्टी के हर उतार-चढ़ाव और गठबंधन की राजनीति में उनकी भूमिका एक कुशल मध्यस्थ और मार्गदर्शक की रही है।

नीतीश से 50 साल पुराना रिश्ता

अपनी आधिकारिक विज्ञप्ति में त्यागी ने स्पष्ट किया है कि भले ही वे पार्टी के सदस्य नहीं रहे, लेकिन नीतीश कुमार के प्रति उनका सम्मान कम नहीं हुआ है। उन्होंने लिखा कि नीतीश कुमार लगभग आधी सदी (50 साल) से उनके साथी रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जेडीयू की आंतरिक बदलती परिस्थितियों और नीतीश कुमार के सक्रिय मुख्यमंत्री पद से हटने के फैसले ने संभवतः त्यागी को भी संगठन से दूरी बनाने पर मजबूर कर दिया है।

22 मार्च की बैठक पर टिकी निगाहें

के.सी. त्यागी ने अब भविष्य की रणनीति तय करने के लिए 22 मार्च 2026 को दिल्ली के मावलंकर हॉल में अपने समर्थकों और समान विचारधारा वाले लोगों की एक बड़ी बैठक बुलाई है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे चौधरी चरण सिंह, डॉ. राम मनोहर लोहिया और कर्पूरी ठाकुर की विचारधारा पर चलते रहेंगे। इस बैठक में तय होगा कि क्या त्यागी किसी नए राजनीतिक मोर्चे का गठन करेंगे या फिर किसी अन्य बड़ी भूमिका में नजर आएंगे।