बिहार में AK-47 से बरसाता था मौत, दर्जनों हत्याओं में शामिल कुख्यात नक्सली सुरेश कोड़ा ने किया आत्मसमर्पण, लाखों का था इनाम

सुरेश कोड़ा ने दो इंसास राइफल, एक AK-47, एक AK-56, बड़ी संख्या में कारतूस (INSAS, SLR और AK-47 के), दस मैगजीन और अन्य गोला-बारूद के साथ आत्म समर्पण किया है.

Naxalite surrenders
Naxalite surrenders- फोटो : news4nation

 Bihar News : बिहार में लंबे समय तक आतंक का पर्याय बना कुख्यात नक्सली सुरेश कोड़ा उर्फ मुस्तकीम ने आखिरकार आत्मसमर्पण कर दिया। तीन लाख रुपये का इनामी यह नक्सली कई बड़ी वारदातों और दर्जनों हत्याओं में शामिल रहा है। उसने बिहार एसटीएफ और पुलिस उपमहानिरीक्षक, मुंगेर के समक्ष हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया।


पुलिस के अनुसार, सुरेश कोड़ा पिछले 25 वर्षों से सक्रिय था और SAC (स्पेशल एरिया कमेटी) का सदस्य रहा है। उसके खिलाफ मुंगेर, लखीसराय और जमुई जिलों के विभिन्न थानों में करीब 60 नक्सल कांड दर्ज हैं। वह कई हमलों में AK-47 और अन्य आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल करता था।


अवैध हथियारों का जखीरा बरामद

आत्मसमर्पण के दौरान उसके पास से भारी मात्रा में हथियार और कारतूस बरामद किए गए। इनमें दो इंसास राइफल, एक AK-47, एक AK-56, बड़ी संख्या में कारतूस (INSAS, SLR और AK-47 के), दस मैगजीन और अन्य गोला-बारूद शामिल हैं। कुल 505 कारतूस बरामद किए गए।


मुंगेर में नक्सल विरोधी अभियान का असर

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मुंगेर जिले के पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में चलाए जा रहे लगातार नक्सल विरोधी अभियानों के कारण संगठन कमजोर पड़ा है। इसी दबाव में सुरेश कोड़ा ने आत्मसमर्पण का रास्ता चुना। इससे पहले भी 28 दिसंबर 2025 को तीन इनामी नक्सली कमांडरों—बाबूलाल कोड़ा, नारायण कोड़ा और विनोद कोड़ा—ने आत्मसमर्पण किया था। इसके अतिरिक्त 27 जुलाई 2025 को भी एक सक्रिय नक्सली दस्ते के सदस्य ने हथियार छोड़े थे। लगातार हो रही कार्रवाई से नक्सली संगठन की कमर टूटती दिख रही है।


नक्सल मुक्त होने की ओर बिहार

पुलिस का दावा है कि सुरेश कोड़ा के आत्मसमर्पण के बाद मुंगेर सहित पूरे बिहार में नक्सली नेटवर्क लगभग समाप्ति की ओर है और राज्य तेजी से नक्सल मुक्त हो रहा है। अधिकारियों ने इसे नक्सल विरोधी रणनीति और पुनर्वास नीति की बड़ी सफलता बताया है। कुख्यात नक्सली के आत्मसमर्पण को सुरक्षा बलों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, जिससे क्षेत्र में शांति और विकास की राह और मजबूत होने की उम्मीद है।

अनिल की रिपोर्ट