Bihar Women Employment Scheme:अब 26 सितंबर को मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की पहली किस्त होगी जारी, 75 लाख महिलाओं के खाते में 10-10 हजार रुपये भेजे जाएँगे...

Bihar Women Employment Scheme: बिहार की सियासत में 26 सितंबर का दिन ऐतिहासिक होगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 26 सितंबर को महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की पहली किस्त जारी करेंगे। ...

Bihar Women Employment Scheme:अब 26 सितंबर को मुख्यमंत्री मह
अब 26 सितंबर को मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की पहली किस्त होगी जारी- फोटो : social Media

Bihar Women Employment Scheme: बिहार की सियासत में 26 सितंबर का दिन ऐतिहासिक होगा।  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 26 सितंबर को महिलाओं को आत्मनिर्भर  बनाने के लिए मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की पहली किस्त जारी करेंगे।  इस योजना के तहत राज्य की लगभग 50 लाख महिलाओं के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से 10-10 हज़ार रुपये की पहली किस्त भेजी जाएगी। कुल 5 हज़ार करोड़ रुपये का यह वितरण ‘आर्थिक आज़ादी’ की ओर एक बड़ा क़दम माना जा रहा है।

राजधानी पटना से लेकर सूबे के हर कोने तक इस मौके को उत्सव की शक्ल दी गई है। मुख्यमंत्री स्वयं 26 सितंबर को राशि ट्रांसफर करेंगे, जिसका सीधा प्रसारण न केवल ज़िला मुख्यालयों तक बल्कि पंचायत स्तर तक किया जाएगा। ग्रामीण विकास विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने सभी जिलों के डीएम को साफ़ निर्देश दिए हैं कि इसे उत्सव के तौर पर मनाया जाए, ताकि जन-जन तक सरकार का संदेश पहुंचे और महिलाओं में आत्मविश्वास की नई लहर दौड़े।

इस योजना की ख़ासियत यह है कि इसे जनभागीदारी और सामूहिक चेतना से जोड़ा गया है।सभी 38 जिला मुख्यालयों पर डीएम की अध्यक्षता में बड़े कार्यक्रम होंगे, जिनमें हज़ारों महिलाएं और जनप्रतिनिधि शामिल होंगे।534 प्रखंड मुख्यालयों में बीडीओ की अध्यक्षता में समारोह होगा, जिसमें कम से कम 500 महिलाएं भाग लेंगी।

जीविका समूह से जुड़ी दीदियों को इस योजना में केंद्रीय भूमिका दी गई है। दरअसल, स्वयं सहायता समूह (SHG) ही इस योजना का मज़बूत आधार हैं, जो गांव-गांव में महिलाओं को संगठित कर आत्मनिर्भरता का संदेश देते आ रहे हैं।

सरकार का दावा है कि यह योजना केवल आर्थिक मदद भर नहीं है, बल्कि सशक्तिकरण का असली औज़ार है। 10 हज़ार की यह पहली किस्त महिलाओं को छोटे-मोटे स्वरोज़गार, खेती, पशुपालन, सिलाई-बुनाई, हस्तशिल्प या किसी भी व्यापार की शुरुआत के लिए प्रेरित करेगी। लंबे समय से परिवार की मजबूरियों और तंगहाली से जूझ रही महिलाओं को इससे राहत तो मिलेगी ही, साथ ही वे अपने परिवार को भी संबल प्रदान कर सकेंगी।

गांव की दीदी अगर सिलाई मशीन खरीदकर काम शुरू करती है, तो इसका असर सीधे उनके बच्चों की पढ़ाई और घर की रसोई पर पड़ेगा। यह योजना दरअसल परिवार की अर्थव्यवस्था को महिला के हाथ में सौंपने का एक अभिनव प्रयोग है।

सरकार के आंकड़ों के अनुसार अब तक लगभग 1 करोड़ 5 लाख महिलाओं ने इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया है। वहीं, 1 लाख 40 हज़ार से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के लिए आवेदन कर चुकी हैं। यह साफ़ इशारा करता है कि ग्रामीण और शहरी, दोनों ही क्षेत्रों की महिलाएं इस योजना को लेकर उत्साहित हैं।

योजना का लाभ वही महिलाएं उठा पाएंगी, जिनकी उम्र 18 से 60 वर्ष के बीच है और जिनके पति या परिवार के अन्य सदस्य आयकरदाता या सरकारी नौकरी में नहीं हैं। अविवाहित महिलाएं जिनके माता-पिता नहीं हैं, वे भी इस योजना में शामिल की गई हैं।

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को लेकर बिहार ने जो पहल की है, वह दरअसल आर्थिक न्याय और सामाजिक बदलाव की दिशा में बड़ी छलांग है। सत्ता पक्ष इसे ‘नीतीश कुमार का मास्टरस्ट्रोक’ बता रहा है, तो विपक्ष इसे ‘चुनावी शगूफ़ा’ कहकर खारिज कर रहा है। लेकिन एक बात तय है कि 50 लाख महिलाओं के बैंक खातों में सीधे पहुंची यह राशि उनके जीवन की तस्वीर बदलने का सामर्थ्य रखती है।