Bihar hijab controversy: 23 दिनों बाद ज्वाइनिंग अब पटना के इस अस्पताल में ड्यूटी करेंगी नुसरत परवीन, सीएम नीतीश के हिजाब हटाने से शुरु हुआ था विवाद
Bihar hijab controversy: पटना में हिजाब विवाद के बाद चर्चा में आई नुसरत परवीन ने नौकरी ज्वाइन कर ली है। जिसके बाद उनकी ड्यूटी पटना के इस अस्पताल में लग गई है। नुसरत यहीं अपना योगदान देंगी।
Bihar hijab controversy: बिहार में हिजाब विवाद का चर्चा थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच बड़ी खबर सामने आई की नुसरत परवीन ने 23 दिन बाद आखिरकार नौकरी ज्वाइन कर ली है। नुसरत की ज्वाइनिंग को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही थी। वहीं अब ना सिर्फ नुसरत ने बिहार सरकार की नौकरी ज्वाइन कर लिया है बल्कि उन्हें पोस्टिंग भी मिल गई है। नुसरत को पटना सिटी स्थित गुरु गोबिंद सिंह अस्पताल में तैनात किया गया है।
इस अस्पताल में हुई तैनात
जानकारी अनुसार आयुष डॉक्टर नुसरत परवीन ने करीब 23 दिनों बाद मंगलवार, 7 जनवरी को अपनी नौकरी ज्वाइन कर ली है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, नुसरत ने सीधे स्वास्थ्य विभाग में पहुंचकर औपचारिक रूप से ज्वाइनिंग की और उन्हें पटना सिटी स्थित गुरु गोबिंद सिंह (GGS) अस्पताल में तैनात किया गया है। बताया जा रहा है कि नुसरत की ज्वाइनिंग को लेकर अधिकारियों पर दबाव था, इसी कारण उन्होंने सिविल सर्जन कार्यालय में उपस्थित होने के बजाय सीधे विभाग में जॉइनिंग की प्रक्रिया पूरी की।
2 बार बढ़ाई गई थी ज्वाइनिंग की अंतिम तारीख
नुसरत के लिए 20 दिसंबर जॉइनिंग की अंतिम तिथि थी, जिसे पहले 31 दिसंबर और फिर बढ़ाकर 7 जनवरी किया गया था। इस तरह मंगलवार को जॉइनिंग का उनका आखिरी अवसर था। जानकारी के मुताबिक, डॉ. नुसरत परवीन का मेडिकल 6 जनवरी को पटना सिविल सर्जन के यहां हुआ था। हालांकि वे स्वयं सिविल सर्जन कार्यालय नहीं पहुंचीं। विभागीय प्रक्रिया के तहत उनके मेडिकल कागजात पर सिविल सर्जन ने हस्ताक्षर किए, जिसके बाद तय समय-सीमा के भीतर उनकी ज्वाइनिंग पूरी कर ली गई। इस पूरे मामले पर पटना सिविल सर्जन ने कैमरे के सामने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
क्या था पूरा मामला
गौरतलब है कि 15 दिसंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र बांटने के दौरान नुसरत परवीन का हिजाब हटाया था। इस घटना के बाद वह सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आईं और लंबे समय तक उनकी ज्वाइनिंग को लेकर असमंजस बना रहा। हिजाब विवाद को लेकर देशभर में राजनीतिक और कानूनी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। यह मामला अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक भी पहुंचा और अल जजीरा समेत कई विदेशी मीडिया संस्थानों ने भारत में हुए विरोध प्रदर्शनों को प्रमुखता से प्रकाशित किया।