Bihar News : कचरा अब समस्या नहीं बना समाधान, सारण के इसुआपुर प्रखंड में जैविक खाद बना वरदान, जानिए क्या है पूरा मामला
Bihar News : सारण जिले के इसुआपुर प्रखंड में घरों और दुकानों से निकलने वाले गीले व सूखे अपशिष्ट का आधुनिक ट्रीटमेंट करके उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार की जा रही है।
PATNA : बिहार में कचरा अब समस्या नहीं बल्कि जैविक संसाधन का नया रूप बन रहा है। राज्य के सारण जिले के इसुआपुर प्रखंड में घर से निकलने वाले अपशिष्ट कचरे का ट्रीटमेंट करके जैविक खाद के रूप में तैयार किया जा रहा है। इस जैविक खाद को ग्रामीण अपने फसल की सेहत व मिट्टी की गुणवत्ता को बरकरार रखने के लिए इस्तेमाल कर रहे है। इसुआपुर प्रखंड में स्वच्छता की परिभाषा को नया आयाम दे रहे ग्रामीणों ने जैविक खाद से ही खेती करने का रामबाण तरीका अपनाया है। कचरे से खाद तक का सफर अब घरों-दुकान से निकलने वाले बेकार अपशिष्ट को बोझ की जगह अमृतमाटी के रूप में तब्दील करके सतत् विकास में नया योगदान दे रहे है।
प्रखंड के 13 पंचायतों में से 10 पंचायतों में जैविक खाद का हो रहा उत्पादन
इसुआपुर प्रखंड के विकास पदाधिकारी सत्यम सिंह ने कहा कि हमारे प्रखंड के 13 पंचायतों में 10 पंचायतों में जैविक खाद का उत्पादन हो रहा है। आंकड़ों की बात करें तो कचरे से अबतक 6200 किलोग्राम जैविक खाद का उत्पादन किया जा चुका है। जिसमें 3000 किलोग्राम जैविक खाद बेचकर पंचायतों के विकास कार्य में इस्तेमाल किया जा रहा हे। घरों से निकलने वाले अपशिष्ट कचरों को सेंटर पर रिसाइकल करके खाद तैयार किया जाता है।
स्पेशल तकनीक से तैयार होता अमृत माटी कई लेयरों में मिलती ट्रीटमेंट
इसुआपुर स्थित स्वच्छता पर्यवेक्षक अजीत कुमार ने कहा कि इस खाद को तैयार करने के लिए स्पेशल तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। घरों से निकलने वाले अपशिष्ट कचरे को रिसाइकल सेंटर पर लाकर ट्रीटमेंट दिया जाता है। उसके बाद अमृत माटी जैविक खाद को गोबर व मिट्टी से कई लेयरों में छानकर इससे खाद के रूप में तैयार किया जाता है। खाद को मिट्टी में जैविक प्रदार्थ व पोषक की गुणवत्ता बनायें रखने के लिए सस्ते दाम पर खरीदकर ले जाते है।
लैब टेस्टिंग में तय अमृत माटी मिट्टी के लिए वरदान फसलों की गुणवत्ता को बढ़ाने में असरदार
इसुआपुर प्रखंड के राज छपिया गांव के मुखिया मिथलेश कुमार यादव ने कहा कि लैब टेस्टिंग में यह तय हुआ कि अमृत माटी मिट्टी खेतों के लिए वरदान साबित हो रहा है। इससे सब्जी,गेंहू,धान की खेती में इसका इस्तेमाल कर गुणवत्तापूर्ण फसल उगाया जा रहा है। किसानों की सुविधा के लिए 80 रुपये प्रति 10 किलोग्राम इस खाद की कीमत तय की गयी है। अब बिहार में आधुनिकता के साथ किसानों को खेती के लिए नया मॉडल तैयार किया जा रहा है। जिससे पर्यवरण संरक्षण के साथ बिना रसायनिक प्रदार्थों का इस्तेमाल करके स्वास्थ्य फसलों की कल्पना पूरी की जा रही है।