Pappu Yadav:नेताओं-अफसरों से बचाओ बेटियों की आबरू... पप्पू यादव का शक्ति शंखनाद, माँ काली के जयकारे से सत्ता के गलियारों में हड़कंप

Pappu Yadav: बिहार की सियासत के रॉबिनहुड कहे जाने वाले पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने माँ काली की प्राण-प्रतिष्ठा के मंच से एक ऐसा सियासी दांव खेला है, जिसने सत्ता पक्ष के खेमे में खलबली मचा दी है।...

Pappu Yadav Rallies for Women Protect Daughters Honor
नेताओं-अफसरों से बचाओ बेटियों की आबरू- फोटो : reporter

Pappu Yadav: बिहार की सियासत के रॉबिनहुड कहे जाने वाले पूर्णिया सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने वैशाली के बिदुपुर (खपुरा गाँव) में माँ काली की प्राण-प्रतिष्ठा के मंच से एक ऐसा सियासी दांव खेला है, जिसने सत्ता पक्ष के खेमे में खलबली मचा दी है। टीवी डिबेट्स में अक्सर कर्मकांड और आडंबरों पर तल्ख तेवर अख्तियार करने वाले पप्पू यादव आज एक अलग ही अंदाज-ए-बयां में नज़र आए। उन्होंने न केवल माँ काली का जयकारा लगाया, बल्कि पंडितों को ससम्मान बुलाकर पूजा-अर्चना भी की, जिसे विरोधी अब उनकी 'रणनीतिक तब्दीली' करार दे रहे हैं।

सियासी चश्मे से आस्था का मंजर

अक्सर बाबाओं और पाखंड के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले सांसद का यह अवतार देख सियासी गलियारों में चर्चा आम है कि पप्पू यादव अब 'सॉफ्ट हिंदुत्व' और जन-सरोकार के मेल से सत्ता की चूलें हिलाने की तैयारी में हैं। मंदिर के मंच का इस्तेमाल उन्होंने अध्यात्म के लिए कम और सरकार की घेराबंदी के लिए ज्यादा किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि धर्म आडंबर नहीं, बल्कि मजलूमों और बेटियों के हक के लिए सीना तानकर खड़े होने का नाम है।

"निजाम के रहनुमा ही बने भक्षक": तीखा हमला

पप्पू यादव ने बिहार की कानून-व्यवस्था पर नश्तर चलाते हुए कहा कि सूबे में बेटियां असुरक्षित हैं और वर्तमान सरकार अपराधियों की सरपरस्त (संरक्षक) बनी हुई है। उन्होंने एक बेहद सनसनीखेज बयान देते हुए कहा कि आज बिहार की बेटियों को सिर्फ सड़क छाप लफंगों से ही नहीं, बल्कि सफेदपोश नेताओं और रसूखदार अधिकारियों की नापाक नजरों से भी बचाने की जरूरत है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो उसे लोकतंत्र नहीं, जंगलराज की पराकाष्ठा कहते हैं।

भक्ति के बहाने 'इंकलाब' की अपील

सांसद ने माँ काली को अन्याय के विनाश का प्रतीक बताते हुए कहा कि हुकूमत के गलियारों में बैठे लोग शक्ति की पूजा का स्वांग रचते हैं, लेकिन हकीकत में वे संवेदनहीनता की चादर ओढ़े हुए हैं। उन्होंने भंडारे में प्रसाद वितरण कर खुद को जनता के बीच 'अवाम का सिपाही' साबित करने की कोशिश की। पप्पू यादव का यह तेवर साफ संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में वे बेटियों की सुरक्षा और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बिहार सरकार के लिए 'वबाल-ए-जान' बनने वाले हैं।

रिपोर्ट- ऋषभ कुमार