साल 2019 में पटना को किसने डुबोया? सात साल बाद सरकार का यू-टर्न, जिन इंजीनियरों पर गिरी थी गाज, अब सभी हो गए बरी
Bihar News: साल 2019 में पटना के जलजमाव के लिए जिन इंजीनियरों को कठघरे में खड़ा किया गया था, वे अब दोषी नहीं माने जा रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल अगर अधिकारी और इंजीनियर जिम्मेदार नहीं थे, तो पटना को डुबोने का कसूरवार कौन था?...
Bihar News: राजधानी पटना को आखिर 2019 में किसने डुबोया था? वह कौन जिम्मेदार था, जिसकी लापरवाही ने लाखों लोगों को अपने ही घरों में जल कैदी बनने पर मजबूर कर दिया? वह मंजर आज भी लोगों के जेहन में ताजा है, जब कई दिनों तक राजधानी पानी में डूबी रही,सड़कें नहर बन गईं, घर तालाब में तब्दील हो गए और जनजीवन पूरी तरह बेपटरी हो गया। हालात इतने संगीन थे कि तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को भी उनके निजी आवास से रेस्क्यू करना पड़ा था। उस वक्त मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पूरे देश में जमकर छिछालेदर हुआ था।
उस समय मुख्यमंत्री नीतीश ने सख्त लहजे में ऐलान किया था कि पटना को डुबोने वालों पर ऐसी कार्रवाई होगी जिसे लोग बरसों तक याद रखेंगे। इसके बाद गृह विभाग के तत्कालीन सचिव की अध्यक्षता में हाई लेवल जांच समिति गठित की गई। जांच रिपोर्ट आई, कई इंजीनियरों और अधिकारियों को दोषी ठहराया गया, निलंबित किया गया और विभागीय कार्रवाई शुरू हुई। लेकिन सात साल बाद सरकार का रुख पूरी तरह बदल गया है।
पथ निर्माण विभाग ने 28 जुलाई 2026 को जारी तीन अलग-अलग अधिसूचनाओं के जरिए उन तीन वरिष्ठ इंजीनियरों को पूरी तरह आरोपमुक्त कर दिया, जिन पर 2019 के जलजमाव के लिए कार्रवाई की गई थी। इनमें तत्कालीन कार्यपालक अभियंता-सह-प्रभारी अधीक्षण अभियंता सूर्यकांत, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता संजीव चौधरी और तत्कालीन अधीक्षण अभियंता ओमप्रकाश सिंह शामिल हैं। उस समय तीनों अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर बुडको में तैनात थे।
बता दें 10 फरवरी 2020 को नगर विकास एवं आवास विभाग ने पथ निर्माण विभाग को पत्र लिखकर इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की थी। हाई लेवल जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में इन अभियंताओं को जलजमाव के लिए जिम्मेदार मानते हुए निलंबन और विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की थी। इसके बाद 14 फरवरी 2020 को तीनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था।
लेकिन अब विभाग ने अपने नए आदेश में कहा है कि सभी अभियंताओं के लिखित जवाब और उपलब्ध तथ्यों की समीक्षा के बाद यह निष्कर्ष निकला कि 2019 का जलजमाव किसी प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि प्राकृतिक आपदा और असाधारण परिस्थितियों का परिणाम था। अत्यधिक बारिश, बिजली आपूर्ति बाधित होने और कई सम्प हाउस बंद पड़ जाने के कारण पानी की निकासी संभव नहीं हो सकी थी। विभाग ने यह भी कहा कि इसी तरह के मामलों में सामान्य प्रशासन विभाग पहले ही कई अधिकारियों को दोषमुक्त कर चुका है।
यानी, सरकार के ताजा फैसले का सीधा अर्थ यह है कि 2019 में पटना के जलजमाव के लिए जिन इंजीनियरों को कठघरे में खड़ा किया गया था, वे अब दोषी नहीं माने जा रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल फिर खड़ा हो गया है अगर अधिकारी और इंजीनियर जिम्मेदार नहीं थे, तो आखिर राजधानी पटना को डुबोने का कसूरवार कौन था? सात साल बाद सरकार के इस यू-टर्न ने उस पूरे मामले पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है, जिसने कभी बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।