Patna Airport Parking Contract Cancelled: पटना एयरपोर्ट में टेंडर का खेल, 24 दिन में ही पार्किंग ठेका रद्द कर एजेंसी को किया बाहर,करोड़ों के निवेश पर संकट...

Patna Airport Parking Contract Cancelled: पटना एयरपोर्ट की मल्टीलेवल कार पार्किंग के संचालन को लेकर एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है।...

Patna Airport Parking Contract Cancelled:  पटना एयरपोर्ट में
एयरपोर्ट अथॉरिटी की कार्यशैली पर उठे सवाल - फोटो : X

Patna Airport Parking Contract Cancelled: पटना एयरपोर्ट की मल्टीलेवल कार पार्किंग के संचालन को लेकर एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। तीन महीने के लिए पार्किंग संचालन का टेंडर देने के बाद महज 24वें दिन ही उसे रद्द कर दिया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस एजेंसी को टेंडर दिया गया था, उसने बैंक गारंटी और अन्य औपचारिकताओं के लिए निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी करने का दावा किया है। इसके बावजूद टेंडर रद्द किए जाने का मामला अब पटना हाईकोर्ट पहुंच गया है।

पार्किंग संचालन के इस विवाद ने एयरपोर्ट प्रशासन की निर्णय प्रक्रिया, टेंडर आवंटन की पारदर्शिता और करोड़ों रुपये के निवेश की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत के बाद एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने जांच कमेटी भी गठित की है।

तीन महीने का टेंडर, 24 दिन में खत्म!

पटना एयरपोर्ट की मल्टीलेवल कार पार्किंग के संचालन का टेंडर हासिल करने वाली एजेंसी स्टील माउंट को तीन महीने के लिए काम सौंपा गया था। लेकिन यह अवधि पूरी होने से पहले ही 27 अगस्त को एकतरफा नोटिस देकर टेंडर रद्द कर दिया गया।

एजेंसी का आरोप है कि बैंक गारंटी और अन्य जरूरी कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए 60 दिनों की मोहलत मिलती है, लेकिन उसे 24वें दिन ही टेंडर रद्द करने का आदेश दे दिया गया।सवाल यह है कि जब टेंडर तीन महीने के लिए दिया गया था, तो फिर 24 दिनों के भीतर ही उसे रद्द करने की नौबत क्यों आई? क्या एजेंसी ने नियमों का उल्लंघन किया था या फिर एयरपोर्ट प्रशासन ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया?

86 लाख की मासिक बोली, करीब एक करोड़ का राजस्व!

मल्टीलेवल कार पार्किंग के संचालन के लिए स्टील माउंट ने 86 लाख रुपये प्रतिमाह की सबसे ऊंची बोली लगाई थी। टैक्स सहित केंद्र सरकार को इससे प्रतिमाह करीब एक करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की बात सामने आई है।इस टेंडर के साथ एयरपोर्ट प्रशासन को राजस्व का बड़ा अवसर मिला था। लेकिन अब टेंडर रद्द होने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी ऊंची बोली लगाने वाली एजेंसी को काम से बाहर करने का फैसला किस आधार पर लिया गया?

एजेंसी की शिकायत के अनुसार, बैंक गारंटी के रूप में 7.26 करोड़ रुपये की राशि 29 अगस्त को पहुंच चुकी थी। इसके अलावा मल्टीलेवल पार्किंग के संचालन के लिए एस्केलेटर, बूम बैरियर, सीसीटीवी और मार्जिन मनी सहित करीब 10 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका था।

ऐसे मे टेंडर रद्द होने से एजेंसी के निवेश और भविष्य के संचालन पर संकट खड़ा हो गया है।

पुराने ऑपरेटर को 10 साल का कॉन्ट्रैक्ट, नए को तीन महीने भी नहीं!

इस पूरे मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू पुराने ऑपरेटर से जुड़ा है। एजेंसी के अनुसार, 1 सितंबर 2025 को पुराने ऑपरेटर को 10 साल का दीर्घकालिक कंसेशन दिया गया था।

हालांकि, पुराने ऑपरेटर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने पहले यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। बाद में 27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने पुरानी एजेंसी की याचिका खारिज कर दी।

इसके बाद 2 अगस्त 2026 को स्टील माउंट को तीन महीने के लिए शॉर्ट-टर्म टेंडर सौंपा गया। लेकिन 27 अगस्त को ही टेंडर रद्द कर दिया गया।

यहां बड़ा सवाल है कि एक ऑपरेटर को 10 साल का कंसेशन देने की प्रक्रिया और दूसरे ऑपरेटर को महज 24 दिनों में बाहर करने की कार्रवाई के बीच नियमों का आधार क्या रहा?

एयरपोर्ट प्रशासन का पक्ष: नियमों का पालन नहीं, इसलिए रद्द किया टेंडर

एयरपोर्ट प्रशासन की ओर से इस मामले में अलग पक्ष सामने आया है। प्रशासन का कहना है कि एजेंसी ने निर्धारित समय-सीमा में बैंक गारंटी जमा नहीं की थी।

एयरपोर्ट प्रशासन के मुताबिक, 25 अगस्त तक बैंक गारंटी जमा करने की समय-सीमा दी गई थी, लेकिन उसका पालन नहीं किया गया। इसलिए टेंडर रद्द करने का आदेश जारी किया गया।

प्रशासन का यह भी कहना है कि नियमों के तहत निकाले गए नए टेंडर में स्टील माउंट ने हिस्सा नहीं लिया।

हालांकि, एजेंसी की ओर से बैंक गारंटी और अन्य प्रक्रियाओं को लेकर अलग दावा किया जा रहा है। दोनों पक्षों के दावों के बीच अब जांच कमेटी की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

जांच कमेटी से उठेगी जवाबदेही की परत?

एजेंसी ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से भी शिकायत की है। शिकायत के बाद एयरपोर्ट अथॉरिटी ने जांच कमेटी गठित की है।

अब इस जांच में कई अहम सवालों के जवाब तलाशने होंगे—

-क्या टेंडर रद्द करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया?

- बैंक गारंटी जमा करने की वास्तविक तारीख क्या थी?

- क्या एजेंसी को पर्याप्त समय और अवसर दिया गया?

- टेंडर रद्द करने का निर्णय नियमों के अनुरूप था?

- करोड़ों रुपये के निवेश और सरकारी राजस्व पर पड़ने वाले प्रभाव की समीक्षा की गई?

करोड़ों का निवेश, राजस्व का सवाल और जवाबदेही की परीक्षा

पटना एयरपोर्ट की मल्टीलेवल कार पार्किंग यात्रियों की सुविधा और सरकारी राजस्व दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। ऐसे में इसके संचालन को लेकर विवाद का पैदा होना एयरपोर्ट प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।अब निगाहें जांच कमेटी की रिपोर्ट और पटना हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई पर हैं। यदि टेंडर रद्द करने की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना भी जरूरी होगा।सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पटना एयरपोर्ट में टेंडर नियमों के अनुसार रद्द किया गया, या फिर करोड़ों रुपये के निवेश और सरकारी राजस्व से जुड़े फैसले में कहीं गंभीर चूक हुई?