पटना एयरपोर्ट पर यात्री की मौत? 40 मिनट तक तड़पती रही महिला, डॉक्टर नहीं मिला तो माइक से मांगी भीख; और फिर...
पटना एयरपोर्ट पर रविवार को इलाज के अभाव में बेगूसराय की एक महिला यात्री की मौत हो गई। टर्मिनल पर मेडिकल टीम की गैरमौजूदगी और अस्पताल पहुंचाने में हुई देरी ने एयरपोर्ट प्रशासन की लापरवाही उजागर कर दी है।
Patna - बेगूसराय के साहेबपुर कमाल की रहने वाली 61 वर्षीय निर्मला देवी स्पाइसजेट की फ्लाइट (SG-337) से मुंबई जाने वाली थीं। वह दोपहर 3:00 बजे ही एयरपोर्ट पहुंच गई थीं। शाम करीब 4:30 बजे प्रस्थान क्षेत्र (Departure Area) में अचानक उन्हें बेचैनी हुई और वह फर्श पर गिरकर छटपटाने लगीं।
डॉक्टर नहीं मिले तो पैसेंजरों से मांगी मदद
हैरानी की बात यह है कि उस समय एयरपोर्ट टर्मिनल पर कोई डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी तैनात नहीं था। स्थिति को बिगड़ता देख एयरपोर्ट प्रशासन ने लाउडस्पीकर पर अनाउंसमेंट किया और यात्रियों में से किसी डॉक्टर को मदद के लिए बुलाया। काफी देर बाद एक यात्री डॉक्टर ने आगे आकर महिला को सीपीआर (CPR) दिया, लेकिन तब तक स्थिति नाजुक हो चुकी थी।
अस्पताल ले जाने में हुई आपराधिक देरी
एयरपोर्ट निदेशक चंद्र प्रताप द्विवेदी के अनुसार, महिला 4:40 बजे बेहोश हुई थीं, लेकिन एम्बुलेंस 10 मिनट बाद 4:50 बजे मौके पर पहुंची। इसके बाद उन्हें राजाबाजार स्थित निजी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ शाम 5:13 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यात्रियों का आरोप है कि समय पर प्राथमिक उपचार मिलता तो जान बच सकती थी।
निदेशक ने कबूला: पुराना करार खत्म, मेदांता ने नहीं भेजे डॉक्टर
एयरपोर्ट निदेशक ने स्वीकार किया कि उस समय मेडिकल टीम की तैनाती नहीं थी। उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट का पिछला चिकित्सा करार खत्म हो चुका है और नया करार मेदांता अस्पताल के साथ किया गया है। हालांकि, मेदांता ने अब तक डॉक्टरों की तैनाती शुरू नहीं की है, जिसके कारण यह शून्य (Vacant) स्थिति पैदा हुई।
सुरक्षा और सुविधाओं के दावों की खुली पोल
पटना जैसा व्यस्त हवाई अड्डा, जहाँ से प्रतिदिन हजारों यात्री सफर करते हैं, वहाँ एक प्राथमिक चिकित्सा दल का न होना सुरक्षा में बड़ी चूक है। एक तरफ जहां अंतरराष्ट्रीय मानक हवाई यात्रा को सुरक्षित बनाने का दावा करते हैं, वहीं राजधानी के मुख्य एयरपोर्ट पर चिकित्सा के नाम पर 'सन्नाटा' पसरा मिला।
क्या कहती है जांच की मांग?
इस घटना ने यात्रियों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। पीड़ित परिवार और अन्य यात्रियों ने सवाल उठाया है कि मेदांता के साथ करार होने के बावजूद ड्यूटी पर डॉक्टर क्यों नहीं थे? क्या एयरपोर्ट प्रशासन केवल कागजी खानापूर्ति में व्यस्त था और यात्रियों की जान को जोखिम में छोड़ दिया गया था?
बेगूसराय में शोक की लहर
निर्मला देवी की मौत की खबर मिलते ही उनके पैतृक गांव साहेबपुर कमाल में मातम छा गया है। पति चंद्रशेखर सहनी और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार का कहना है कि उन्होंने हवाई यात्रा इसलिए चुनी थी कि सफर सुरक्षित और आरामदायक होगा, लेकिन उन्हें क्या पता था कि एयरपोर्ट की लापरवाही उनकी जान ले लेगी।