पटना के इस स्कूल में 8 साल से कॉमर्स टीचर नही, फिर भी छात्रा ने किया स्टेट टॉप, स्टूडेंट की कामयाबी पर प्रिसिंपल के छलके आंसू

राजधानी पटना के नामी बांकीपुर गर्ल्स स्कूल में 2018 से कॉमर्स की पढ़ाई तो शुरू हुई, लेकिन आज तक एक भी स्थायी शिक्षक नहीं मिला। 56 छात्राओं का भविष्य अधर में है।

पटना के इस स्कूल में 8 साल से कॉमर्स टीचर नही, फिर भी छात्रा

Patna - कहने को तो यह राजधानी पटना का सबसे प्रतिष्ठित बांकीपुर गर्ल्स हाई सेकेंडरी स्कूल है, जहाँ की बेटियों ने 2026 की इंटरमीडिएट परीक्षा में टॉप कर राज्य का मान बढ़ाया है। लेकिन इस चमक-धमक के पीछे की कड़वी सच्चाई यह है कि यहाँ की 56 छात्राएं बिना शिक्षकों के अपना भविष्य गढ़ने को मजबूर हैं। साल 2018 से यहाँ कॉमर्स की पढ़ाई शुरू की गई, लेकिन विडंबना देखिए कि आज 8 साल बीत जाने के बाद भी विभाग यहाँ एक स्थायी शिक्षक की नियुक्ति नहीं कर सका है।

मुख्य विषयों के शिक्षक 'लापता', भगवान भरोसे बेटियां

स्कूल की स्थिति इतनी भयावह है कि कॉमर्स संकाय के अनिवार्य विषयों जैसे मैथ्स (Maths), भाषा (Language) और केमिस्ट्री (Chemistry) के शिक्षक तक उपलब्ध नहीं हैं। अब तक जैसे-तैसे बीएड के ट्रेनी शिक्षकों से काम चलाया जा रहा था, लेकिन अब वे भी जा चुके हैं। सवाल यह उठता है कि क्या बिना शिक्षकों के सिर्फ ऊंची इमारतों और कागजी दावों से बिहार की बेटियां आगे बढ़ेंगी?

प्राचार्य की गुहार, विभाग का 'बहरापन'

स्कूल की प्राचार्य ने इस बदहाली पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि विभाग को एक-दो बार नहीं, बल्कि कई बार लिखित अनुरोध भेजा गया, लेकिन शिक्षा विभाग की फाइलों में ये रिक्वेस्ट कहीं दबकर रह गई हैं। प्राचार्य का आक्रामक अंदाज यह बताने के लिए काफी है कि वे सिस्टम की इस लापरवाही से कितनी व्यथित हैं। जब राजधानी के नाक के नीचे स्थित स्कूल का यह हाल है, तो सुदूर ग्रामीण इलाकों की कल्पना करना भी डरावना है।

टॉपर निशिका की मेहनत पर विभाग की कालिख!

इसी स्कूल से पढ़कर निशिका कुमारी ने 2026 में इंटरमीडिएट में टॉप किया है। यह निशिका की अपनी मेहनत और जज्बा था, लेकिन विभाग की नाकामी देखिए कि वह निशिका जैसी हजारों अन्य छात्राओं को न्यूनतम संसाधन तक मुहैया नहीं करा पा रहा है। क्या विभाग यह मान चुका है कि बेटियां खुद ही पढ़ लेंगी और उसे अपनी जिम्मेदारी निभाने की जरूरत नहीं है?

56 जिंदगियां और एक बड़ा सवाल

वर्तमान में कॉमर्स की 56 छात्राएं सीधे तौर पर प्रभावित हो रही हैं। यह सिर्फ एक स्कूल की समस्या नहीं, बल्कि बिहार की उस पूरी शिक्षा व्यवस्था पर तमाचा है जो 'बेटी पढ़ाओ' का नारा तो देती है, लेकिन स्कूल में गुरु ही उपलब्ध नहीं करा पाती। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या शिक्षा विभाग इस रिपोर्ट के बाद अपनी गहरी नींद से जागेगा, या फिर इन 56 बेटियों का भविष्य सिस्टम की भेंट चढ़ जाएगा?

रिपोर्ट - वंदना शर्मा