Patna Girls Hostel: पटना के गर्ल्स हॉस्टल में छात्रा से दरिंदगी, इंसाफ की लड़ाई में उतरे प्रशांत किशोर, बिहार की कानून-व्यवस्था पर लगा है बड़ा सवालिया निशान

Patna Girls Hostel: पटना के गर्ल्स हॉस्टल में मेडिकल परीक्षा की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब सियासी और सामाजिक उबाल का रूप ले चुका है।

Patna Girls Hostel Horror Prashant Kishor Demands Fresh Prob
गर्ल्स हॉस्टल में छात्रा से दरिंदगी, इंसाफ की लड़ाई में उतरे प्रशांत किशोर- फोटो : reporter

Patna Girls Hostel: पटना के गर्ल्स हॉस्टल में मेडिकल परीक्षा की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब सियासी और सामाजिक उबाल का रूप ले चुका है। इस दर्दनाक कांड में जहां एक परिवार इंसाफ के लिए भटक रहा है, वहीं अब जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। वह गुरुवार को जहानाबाद पहुंचकर पीड़िता के परिजनों से मिले और उनके जख्मों पर मरहम रखते हुए खाकी की कार्रवाई पर सीधा सवाल दाग दिया।

प्रशांत किशोर ने दो टूक कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस को नए सिरे से जांच करनी चाहिए। उन्होंने माना कि रिपोर्ट में रेप की आशंका से इनकार नहीं किया गया है, ऐसे में शुरुआती तफ्तीश पर सवाल उठना लाजिमी है। उनका कहना था कि अगर जांच में कहीं भी चूक हुई है तो उसे दबाने के बजाय दुरुस्त किया जाना चाहिए, क्योंकि मामला एक बच्ची की जान और उसकी इज्जत से जुड़ा है।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि छात्रा के साथ दरिंदगी हुई और मामले को हल्का करने की कोशिश की जा रही है। परिजनों ने यह भी सनसनीखेज आरोप लगाया कि वर्तमान जांच अधिकारी उन पर दबाव बना रहे हैं और केस वापस लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं। इस बयान के बाद इलाके में गुस्से की आग और भड़क गई है। लोगों का कहना है कि अगर इंसाफ के रास्ते में रुकावट डाली गई तो सड़क से लेकर सदन तक आवाज उठेगी।

परिजनों से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि जन सुराज पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने ऐलान किया कि शुक्रवार को वह परिवार के साथ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मिलेंगे और निष्पक्ष, पारदर्शी व गहन जांच की मांग करेंगे। उनका साफ कहना था कि यह सिर्फ एक मौत का मामला नहीं, बल्कि सिस्टम की साख का सवाल है।

प्रशांत किशोर ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर बच्ची को इंसाफ नहीं मिला तो जन सुराज संविधान के दायरे में रहकर हर जरूरी लोकतांत्रिक कदम उठाएगा। उन्होंने साफ किया कि यह लड़ाई सत्ता या राजनीति की नहीं, बल्कि इंसाफ और इंसानियत की है।

फिलहाल इस मामले ने बिहार की कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। अब देखना यह है कि खाकी सच तक पहुंचती है या फिर यह केस भी फाइलों की धूल में दफन हो जाता है। जनता की नजरें टिकी हैंक्या इस मासूम को इंसाफ मिलेगा या नहीं।

बता दें पटना की चित्रगुप्त नगर में शंभू गर्ल्स हॉस्टल अब ‘खौफ का अड्डा’ बन चुका है। जहानाबाद की मेधावी नीट छात्रा, जो डॉक्टर बनने का सपना देख रही थी, उसी हॉस्टल के कमरे में उसकी लाश मिली। पहले हॉस्टल वाले बोले  “बस नींद की गोली खा ली, सुसाइड टाइप मामला है”। पुलिस ने भी शुरू में वही राग अलापा  “डिप्रेशन, ओवरडोज, कोई गंदा खेल नहीं”। लेकिन पोस्टमार्टम की स्याह स्याही ने सबके मुँह पर तमाचा मार दिया।रिपोर्ट साफ़ चीख रही है  मौत सिर्फ़ दवा के ओवरडोज़ से नहीं हुई। गले पर दबाव के निशान नहीं, मगर पूरे जिस्म पर संघर्ष के निशान, खरोंच, चोटें, सिर पर हेड इंजरी। यौन हमले के साफ़ आसार। शुरुआती डॉक्टर्स ने भी कहा था  “ये मामला सिर्फ़ गोली खाने का नहीं, कुछ और गहरा है”। फिर भी पुलिस ने 24 घंटे तक आँखें मूँदे रखीं।जब सच बाहर आने लगा तो हड़बड़ी में वार्डन मनीष रंजन को पकड़ा गया। हॉस्टल के अंदर साक्ष्य मिटाने का खेल रोकने के लिए। पिता का दर्द साफ़ है  “मेरी बेटी को मारकर फेंका गया, ये सुसाइड नहीं, कत्ल है। हॉस्टल वालों ने CCTV डिलीट कर दिए, कमरे में नकली दवाइयाँ रख दीं, सामान छेड़ा, पैसे लूटे। सब कुछ प्लान करके किया गया।”पुलिस पर भी सवाल गहरा है। पहले बयान दे दिया  “कोई रेप नहीं”। गायनेकोलॉजिस्ट से स्टेटमेंट ले लिया। लेकिन पोस्टमार्टम के बाद अब उल्टा रुख। रिपोर्ट को सेकेंड ओपिनियन के लिए AIIMS पटना भेजा गया है, ताकि कोई कह न सके कि दबाव में रिपोर्ट फर्जी हुई।पिता की आवाज़ में गुस्सा और बेबसी दोनों है  “मेरी बेटी बेहोश पड़ी थी, बोल नहीं पा रही थी, हिल नहीं पा रही थी। मैंने खुद उसके जिस्म पर वो निशान देखे, जो कोई बाप देखकर चुप नहीं रह सकता। ये एक नहीं, कई दरिंदों का कांड है। हॉस्टल, वार्डन, शायद बाहर के भी कुछ लोग… सब मिले हुए हैं।”

रिपोर्ट-रंजीत कुमार