Patna High Court: जमीन मुआवजे पर पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, ये आदेश किया रद्द
Patna High Court: अधिग्रहित जमीन के मुआवजे को लेकर पटना हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अहम फैसला सुनाया है।
Patna High Court: पटना हाईकोर्ट की एक पीठ ने राष्ट्रीय राजमार्ग-82 (NH-82) के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित की गई भूमि के मुआवजे से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा आदेश सुनाया है।कोर्ट ने एकल पीठ द्वारा दिए गए उस आदेश के एक हिस्से को रद्द कर दिया है, जिसमें 12 फीसदी प्रति वर्ष की दर से ब्याज के साथ पंचाट को लागू करने का निर्देश दिया गया था। ये गया और नवादा जिले में एन एच-82 के चार लेन निर्माण के लिए वर्ष 2014 में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई थी। याचिकाकर्ताओं (शिव शंकर प्रसाद व अन्य) की 2.8676 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई थी। भू-अर्जन विभाग ने इसे कृषि भूमि मानकर मुआवजा तय किया था, लेकिन भूमि स्वामियों का दावा था कि यह व्यावसायिक व आवासीय (विकासशील) प्रकृति की भूमि है।
विवाद बढ़ने पर तत्कालीन अपर समाहर्ता गया को मध्यस्थ नियुक्त किया गया, जिन्होंने 4 अगस्त ,2018 को जमीन को 'विकासशील' मानते हुए पंचाट पारित किया। हालांकि, इससे पहले केंद्र सरकार ने 21 जून, 2018 को एक नई अधिसूचना जारी कर प्रमंडलीय आयुक्त को मध्यस्थ नियुक्त कर दिया था।
इसके आधार पर बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के उप महाप्रबंधक ने एक पत्र जारी कर अपर समाहर्ता के आदेश को वापस लेने और मामला नए मध्यस्थ को भेजने को कहा था। स्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस राणा विक्रम सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया किया कि प्रशासनिक आदेश से पंचाट रद्द नहीं हो सकता हैं। कोर्ट ने माना कि 21 जून ,2018 की अधिसूचना भविष्य के मामलों के लिए था और BSRDCL के उप महाप्रबंधक द्वारा जारी पत्र गलत था। एकल पीठ द्वारा इस पत्र को रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा गया है।
हाईकोर्ट ने पाया कि अपर समाहर्ता (मध्यस्थ) ने पंचाट पारित करते समय राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम की धारा 3G(7) के तहत आवश्यक कानूनी बिंदुओं (जैसे- अधिसूचना की तारीख पर बाजार मूल्य, भूमि विभाजन से हुआ नुकसान आदि) पर उचित विचार नहीं किया था। सुप्रीम कोर्ट के हालिया न्यायिक निर्णयों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि चूंकि अधिग्रहण 1 जनवरी ,2015 से पहले का है, इसलिए भूमि स्वामी भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के प्रावधानों के अनुसार ही सोलेशियम और ब्याज पाने के हकदार हैं।
पटना हाइकोर्ट ने सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिया है कि वह तीन महीने के भीतर भूमि (खेसरा नंबर 3243) के मुआवजे की राशि का पुनर्मूल्यांकन करे और 1894 के कानून के अनुसार सोलेशियम व ब्याज का निर्धारण कर भुगतान सुनिश्चित करे।