पटना हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन चुनाव का ऐलान: 17 अप्रैल को वोटिंग, जानें पूरा चुनावी शेड्यूल
पटना हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के 11 पदों के लिए चुनावी बिगुल बज चुका है। नामांकन से लेकर नतीजों तक का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया गया है।
Patna - पटना हाई कोर्ट के सबसे पुराने और बड़े अधिवक्ता संघ, एडवोकेट्स एसोसिएशन के निर्वाचन की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। एसोसिएशन के रिटर्निंग ऑफिसर व वरीय अधिवक्ता अंजनी कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से चुनावी कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा की है। उन्होंने बताया कि विभिन्न पदों के लिए आगामी 17 अप्रैल, 2026 को मतदान कराया जाएगा, जिसके बाद 18 अप्रैल को सुबह 9 बजे से मतपत्रों की गिनती और परिणामों का प्रकाशन किया जाएगा।
नामांकन शुल्क और पदों का विवरण
एसोसिएशन के कुल 11 पदों के लिए यह चुनावी प्रक्रिया संपन्न होगी। इसमें अध्यक्ष पद के लिए नामांकन शुल्क 25 हजार रुपये, जबकि उपाध्यक्ष और महासचिव पद के लिए 20-20 हजार रुपये निर्धारित किए गए हैं। वहीं, कोषाध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवारों को 15 हजार रुपये शुल्क जमा करना होगा। इन मुख्य पदों के अलावा जॉइंट सेक्रेटरी, असिस्टेंट सेक्रेटरी, वरीय सदस्य और कार्यकारिणी सदस्यों के लिए भी मतदान होगा।
महत्वपूर्ण तिथियां और समय सीमा
निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार, उम्मीदवारों को नामांकन पत्र 30 और 31 मार्च, 2026 को उपलब्ध कराए जाएंगे। इच्छुक प्रत्याशी 1 और 2 अप्रैल को अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। इसके बाद, नाम वापसी के लिए 7 अप्रैल तक का समय दिया गया है। पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए एसोसिएशन की लाइब्रेरी में आयोजित प्रेस वार्ता में सभी तकनीकी पहलुओं की जानकारी साझा की गई।
एसोसिएशन का प्रभाव और वर्तमान नेतृत्व
पटना हाई कोर्ट में मुख्यतः तीन अधिवक्ता संघ सक्रिय हैं, जिनमें एडवोकेट्स एसोसिएशन लगभग 10,000 सदस्यों के साथ सबसे प्रभावशाली और पुराना संगठन है। अन्य दो संघों में लायर्स एसोसिएशन और बैरिस्टर एसोसिएशन शामिल हैं। वर्तमान में एडवोकेट्स एसोसिएशन की कमान अध्यक्ष श्री शैलेंद्र सिंह और जनरल सेक्रेटरी जयशंकर प्रसाद सिंह के हाथों में है, जिनका कार्यकाल इस नई चुनावी प्रक्रिया के साथ संपन्न होगा।
लोकतांत्रिक प्रक्रिया की तैयारी
इस चुनाव को लेकर हाई कोर्ट परिसर में वकीलों के बीच उत्साह का माहौल है। रिटर्निंग ऑफिसर अंजनी कुमार ने स्पष्ट किया है कि मतगणना और परिणाम प्रकाशन एक ही दिन (18 अप्रैल) को सुनिश्चित किया गया है ताकि प्रक्रिया में त्वरित स्पष्टता बनी रहे। 10 हजार सदस्यों वाली इस बड़ी इकाई का चुनाव राज्य की न्यायिक बिरादरी के लिए काफी मायने रखता है, क्योंकि यह अधिवक्ताओं के हितों और भविष्य की नीतियों को दिशा देने का काम करता है।