पटना हाई कोर्ट चुनाव: नामांकन शुल्क में भारी बढ़ोतरी को कोर्ट में चुनौती, जस्टिस अजीत कुमार की बेंच में मंगलवार को होगी सुनवाई

पटना हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन चुनाव में नामांकन फीस कई गुना बढ़ाए जाने के खिलाफ याचिका दायर की गई है। कोर्ट ने मामले को मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

पटना हाई कोर्ट चुनाव: नामांकन शुल्क में भारी बढ़ोतरी को कोर्

Patna - पटना हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के 17 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित चुनावों पर कानूनी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। एसोसिएशन द्वारा नामांकन शुल्क (Nomination Fee) में की गई बेतहाशा बढ़ोतरी को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। यह याचिका अधिवक्ता सरोज कुमार द्वारा दाखिल की गई है, जिसमें बढ़ी हुई फीस को 'मनमाना और अवैध' करार दिया गया है।

मल्टीफोल्ड बढ़ोतरी से अधिवक्ताओं पर बढ़ा बोझ

याचिकाकर्ता का तर्क है कि इससे पहले नामांकन शुल्क काफी कम और न्यूनतम स्तर पर हुआ करता था। लेकिन इस बार अचानक इसे कई गुना बढ़ा दिया गया है, जिससे चुनाव लड़ने के इच्छुक अधिवक्ताओं पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है। याचिका में मांग की गई है कि इस वृद्धि को तुरंत निरस्त किया जाए ताकि सभी अधिवक्ता लोकतांत्रिक प्रक्रिया में समान रूप से भाग ले सकें।

इन पदों के लिए तय किया गया भारी शुल्क

इस बार के चुनाव में विभिन्न पदों के लिए जो नामांकन राशि तय की गई है, वह चर्चा और विवाद का केंद्र बनी हुई है:

  • अध्यक्ष पद: 25,000 रुपये

  • उपाध्यक्ष पद: 20,000 रुपये

  • महासचिव पद: 20,000 रुपये

  • कोषाध्यक्ष पद: 15,000 रुपये इसी प्रकार अन्य पदों के लिए भी शुल्क में भारी वृद्धि की गई है, जिसे लेकर अधिवक्ताओं के एक गुट में गहरी नाराजगी है।


  • जस्टिस अजीत कुमार की बेंच में मंगलवार को सुनवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिकाकर्ता ने इसे अतिआवश्यक सुनवाई के लिए जस्टिस अजीत कुमार की बेंच के समक्ष मेंशन किया। अदालत ने मामले की प्राथमिकताओं को देखते हुए इसे मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध (List) करने का निर्देश दिया है। इस मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI), स्टेट बार काउंसिल (पटना), एडवोकेट्स एसोसिएशन और रिटर्निंग ऑफिसर को पक्षकार बनाया गया है।

चुनाव के भविष्य पर टिकी निगाहें

अब सबकी निगाहें मंगलवार को होने वाली सुनवाई और कोर्ट के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं। यदि अदालत फीस वृद्धि पर रोक लगाती है या इसमें बदलाव का आदेश देती है, तो नामांकन की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। कोर्ट के आदेश के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि चुनाव पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होंगे या इसमें कोई फेरबदल किया जाएगा।