Patna High Court: BSSC उर्दू अनुवादक भर्ती पर पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सिंगल बेंच का आदेश रद्द
Patna High Court: बिहार कर्मचारी चयन आयोग की उर्दू अनुवादक भर्ती को लेकर पटना हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। ...
Patna High Court: बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) की उर्दू अनुवादक भर्ती को लेकर पटना हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत की खंडपीठ ने एकल पीठ के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसमें अभ्यर्थियों की आरक्षण श्रेणी की दोबारा जांच करने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट ने चयन प्रक्रिया को फिर से खोलने और अभ्यर्थियों को अपनी श्रेणी बदलने का अवसर देने से इनकार कर दिया है।मुख्य न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति हरीश कुमार की खंडपीठ ने कहा कि चयन प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद निर्धारित नियमों और विज्ञापन की शर्तों से हटकर बदलाव करना उचित नहीं है। इस फैसले से वर्ष 2019 में जारी उर्दू अनुवादक भर्ती विज्ञापन से जुड़ा कानूनी विवाद समाप्त हो गया है।
1,294 पदों पर निकाली गई थी भर्ती
बिहार कर्मचारी चयन आयोग ने विज्ञापन संख्या 01/2019 के तहत उर्दू अनुवादक के कुल 1,294 पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। भर्ती प्रक्रिया के दौरान कुछ अभ्यर्थियों ने आरक्षण श्रेणी के उल्लेख को लेकर आपत्ति जताई थी और इस मामले में अदालत का दरवाजा खटखटाया था।याचिकाकर्ताओं का कहना था कि विज्ञापन में अति पिछड़ा वर्ग के लिए 'EBC' के बजाय 'MBC' शब्द का इस्तेमाल किए जाने से भ्रम की स्थिति पैदा हुई। उनका दावा था कि इसी वजह से उन्होंने आवेदन करते समय अपनी श्रेणी पिछड़ा वर्ग (BC) दर्ज कर दी। बाद में काउंसलिंग के दौरान उन्हें अति पिछड़ा वर्ग (EBC) का लाभ नहीं मिला, जिसके बाद उन्होंने कानूनी राहत की मांग की।
आयोग ने दलील दी- हिंदी विज्ञापन में स्थिति स्पष्ट थी
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से दलील दी गई कि विज्ञापन के हिंदी संस्करण में अति पिछड़ा वर्ग का उल्लेख स्पष्ट रूप से किया गया था। आयोग के अनुसार, कुल 70,824 अभ्यर्थियों में से 31,344 ने अति पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में सफलतापूर्वक आवेदन किया था। आयोग ने इसे इस बात के समर्थन में पेश किया कि विज्ञापन में ऐसी कोई अस्पष्टता नहीं थी, जिससे अभ्यर्थियों को अपनी श्रेणी समझने में कठिनाई होती।
खंडपीठ ने क्यों खारिज की दलील?
हाईकोर्ट ने माना कि अति पिछड़ा वर्ग के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले MBC और EBC शब्दों के अंतर से अपने आप ऐसी अस्पष्टता साबित नहीं होती, जिसके आधार पर पूरी चयन प्रक्रिया को दोबारा खोला जाए। अदालत ने लोक नियुक्तियों में विज्ञापन की शर्तों और निर्धारित नियमों के पालन की आवश्यकता पर जोर दिया।खंडपीठ ने यह भी ध्यान में रखा कि भर्ती की लिखित परीक्षा, काउंसलिंग और अंतिम मेरिट सूची जारी होने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। अंतिम मेरिट सूची 23 नवंबर 2024 को जारी की गई थी। ऐसे में चयन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद असफल अभ्यर्थियों को अपनी श्रेणी बदलने की अनुमति देना निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं होगा।
7 जनवरी 2026 का आदेश निरस्त
इन दलीलों और कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद पटना हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकल पीठ के 7 जनवरी 2026 के आदेश को रद्द कर दिया और संबंधित रिट याचिका खारिज कर दी। अदालत के इस फैसले से आयोग की चयन प्रक्रिया को दोबारा खोलने की मांग को राहत नहीं मिली।