बिहार के आमों को नहीं मिल रहा उचित दाम: पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब, कहा- निर्यात के लिए तैयार करें इंफ्रास्ट्रक्चर

पटना हाईकोर्ट ने बिहार के आम उत्पादकों को फसल की सही कीमत न मिलने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्यात के लिए बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर कड़ा रुख अपनाया है और सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है

बिहार के आमों को नहीं मिल रहा उचित दाम: पटना हाईकोर्ट ने राज

Patna - : बिहार में आम के बंपर उत्पादन के बावजूद किसानों को सही कीमत न मिलने और निर्यात सुविधाओं के अभाव पर पटना हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने अधिवक्ता डॉ. मौर्य विजय चंद्र की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को अगले चार सप्ताह में हलफनामा दायर कर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने विशेष रूप से भागलपुर और पश्चिम चंपारण जैसे जिलों में अब तक की गई कार्रवाइयों का ब्यौरा मांगा है।

पटना हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता डॉ. मौर्य विजय चंद्र ने कोर्ट को बताया कि बिहार में अंतरराष्ट्रीय स्तर के उत्तम श्रेणी के आमों का उत्पादन होता है, लेकिन सरकारी उदासीनता के कारण किसानों को उनकी लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने दलील दी कि फरवरी 2023 से ही सरकार से कई बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई थी, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया। राज्य के आम उत्पादक आज भी बुनियादी ढांचे और सही बाजार के अभाव में बिचौलियों पर निर्भर हैं।

राज्य सरकार ने पूर्व में अपना पक्ष रखते हुए बताया था कि आम उत्पादकों को बेहतर और वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सरकार का दावा है कि किसानों को फसलों की अच्छी कीमत दिलाने और विदेशों में निर्यात के लिए पैकेजिंग व अन्य व्यवस्थाएं की जा रही हैं। हालांकि, कोर्ट ने इन दलीलों पर असंतोष जताते हुए सरकार से पूछा कि इस वर्ष किसानों के प्रशिक्षण के लिए वास्तव में क्या व्यवस्था की गई और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास के लिए अब तक जमीन पर क्या काम हुआ है।

याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि बिहार के आमों (जैसे भागलपुर का जर्दालू) की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग है। यदि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बेहतर कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट और निर्यात के लिए सीधा एयर-लिंक जैसी सुविधाएं विकसित करें, तो न केवल किसानों की आय में भारी वृद्धि होगी, बल्कि राज्य को बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा भी प्राप्त होगी। बुनियादी ढांचे के अभाव में हर साल टन के हिसाब से फल बर्बाद हो जाते हैं।

पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने भागलपुर और पश्चिम चंपारण जिलों में आम उत्पादन को लेकर किए जा रहे विशिष्ट कार्यों की रिपोर्ट मांगी थी। इन जिलों को आम उत्पादन का केंद्र माना जाता है। कोर्ट यह जानना चाहता है कि इन क्षेत्रों में आम की ब्रांडिंग और निर्यात के लिए क्या विशेष क्लस्टर बनाए गए हैं या नहीं। सरकार की ओर से पेश किए गए पिछले ब्यौरे को अपूर्ण मानते हुए खंडपीठ ने अब विस्तृत हलफनामे की मांग की है।

इस महत्वपूर्ण मामले पर अब चार सप्ताह बाद अगली सुनवाई होगी। तब तक राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह किसानों को मिलने वाले प्रशिक्षण और निर्यात के लिए विकसित की जा रही सुविधाओं का स्पष्ट रोडमैप अदालत के सामने रखे। इस फैसले से बिहार के लाखों आम उत्पादक किसानों में एक उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में उनकी मेहनत का उचित मोल मिल सकेगा।