प्रमोशन मिला,पे-स्लिप बनी पर नहीं दी जिम्मेदारी! पटना हाईकोर्ट पहुंचे DTO, कोर्ट ने कहा-बिना काम वेतन देना गलत,पोस्टिंग कीजिये!

पटना हाईकोर्ट ने सारण के पदोन्नत DTO संजय कुमार अश्क की याचिका पर सुनवाई करते हुए बिहार सरकार और परिवहन विभाग को कड़ा संदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि बिना कार्यभार के वेतन देना अनुचित है।

Patna High Court direction on DTO posting
प्रोन्नति और पे-स्लिप मिलने के बावजूद काम न सौंपना पड़ा भारी- फोटो : news 4 nation AI

सारण (छपरा) में कार्यरत संजय कुमार अश्क, जिनकी नियुक्ति वर्ष 2012 में मोटर वाहन निरीक्षक (MVI) के रूप में हुई थी, को 'बिहार परिवहन सेवा नियमावली, 2020' के तहत 6 अप्रैल 2026 को जिला परिवहन अधिकारी (DTO) के पद पर पदोन्नत किया गया। वित्त विभाग द्वारा लेवल-9 का पे-स्लिप जारी होने और छपरा में पदभार संभालने के बावजूद उन्हें नियमित कार्य आवंटित नहीं किया गया। पहले से बिहार प्रशासनिक सेवा (BAS) के एक प्रभारी अधिकारी के वहां तैनात होने के कारण वे केवल MVI और कार्यवाहक प्रभार में ही अटके रह गए, जिसके खिलाफ उन्होंने पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।


सुप्रीम कोर्ट के 'पी.के. चिन्नासामी केस' का दिया हवाला

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील ने उच्चतम न्यायालय के प्रसिद्ध फैसले पी.के. चिन्नासामी बनाम तमिलनाडु सरकार का हवाला दिया। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी थी कि लोक सेवक एक ट्रस्टी की तरह होता है और सरकार का यह दायित्व है कि अधिकारी को उसके पद और वेतन के अनुरूप कार्य सौंपे। किसी अधिकारी को पद पर बनाए रखकर बिना काम दिए संचित निधि (Consolidated Fund) से वेतन देना पूरी तरह अनुचित है। इसी आधार पर याचिकाकर्ता ने विभाग में दिए गए अपने अभ्यावेदन पर नियमित पोस्टिंग की मांग की।


न्यायमूर्ति कुमार मनीष का आदेश: 4 हफ्तों में हो अभ्यावेदन पर फैसला

मामले की सुनवाई करते हुए माननीय न्यायमूर्ति कुमार मनीष की एकल पीठ ने राज्य सरकार की सहमति से याचिका का निष्पादन कर दिया। हाईकोर्ट ने परिवहन विभाग के सचिव को सख्त निर्देश दिया है कि वे याचिकाकर्ता द्वारा 21 अगस्त 2026 को दिए गए अभ्यावेदन पर अगले 4 हफ्तों के भीतर विचार कर अंतिम आदेश पारित करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि सचिव द्वारा जारी आदेश 'तर्कसंगत और स्पष्ट' (Reasoned and Speaking Order) होना चाहिए, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के तय सिद्धांतों का पालन हो और याचिकाकर्ता को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी दिया जाए।


दो हफ्तों के भीतर नियमित पोस्टिंग देने का निर्देश

अदालत ने अपने आदेश में यह साफ कर दिया कि यदि परिवहन सचिव इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि याचिकाकर्ता राहत का हकदार है, तो फैसला आने के 2 सप्ताह के भीतर उन्हें उपयुक्त और नियमित पदस्थापना (Regular Posting) प्रदान की जाए। पटना हाईकोर्ट का यह निर्णय राज्य प्रशासनिक तंत्र के लिए एक कड़ा संदेश है कि किसी अधिकारी को प्रोन्नति और वित्तीय लाभ देने के बाद बिना कार्यभार के रखना प्रशासनिक और कानूनी दोनों रूप से गलत है।

धीरज पराशर की रिपोर्ट