Bihar News : पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा नियुक्ति नियमों में बीच में बदलाव गलत, कोर्ट ने कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक को बहाल करने का दिया आदेश

Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत वर्ष 2010 में बनाए गए नियमों में नियुक्ति प्रक्रिया के बाद वर्ष 2017 में संशोधन कर कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है।

Bihar News : पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा नियुक्ति नियमो
पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : पटना हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण  निर्णय में यह स्पष्ट कहा हैं कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत वर्ष 2010 में बनाए गए उपबंध के तहत नियुक्ति प्रक्रिया में वर्ष 2017 में संशोधन कर बदलाव नहीं कर सकती। जस्टिस आलोक कुमार सिन्हा की एकलपीठ ने डॉ रविन्द्र कुमार सोहन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की। 

आवेदक की ओर से कोर्ट को बताया गया कि सीधी भर्ती से दूरस्थ शिक्षा के निदेशक पद के लिए वर्ष 2011 में सबौर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने जारी की थी। उनका कहना था कि आवेदक का प्रारंभिक नियुक्ति 1991 में कनिष्ठ वैज्ञानिक-सहायक प्राध्यापक के पद पर हुई थी। इसके बाद उन्हें वरिष्ठ वैज्ञानिक-सह-एसोसिएट प्रोफेसर और विश्वविद्यालय प्रोफेसर-सह-मुख्य वैज्ञानिक के पद पर पदोन्नति दी गई। 

वर्ष 2011 में विश्वविद्यालय की ओर से जारी विज्ञापन के आधार पर नियमित चयन प्रक्रिया से गुजरने के बाद 14 दिसंबर 2011 को उनकी सीधी भर्ती के माध्यम से निदेशक (प्रसार शिक्षा) के पद पर नियुक्ति हुई। लेकिन वर्ष 2017 में विश्वविद्यालय के एक नया नियम लागू कर निदेशक के पद पांच वर्ष का कार्यकाल होने का नियम बनाया और इस नियम का हवाला देते हुए आवेदक को 2025 में पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा होने की बात कह निदेशक के पद से हटाकर उसके समक्ष दूसरे पद पर भेजे जाने का आदेश जारी किया।इसी आदेश की वैधता को हाई कोर्ट में चुनौती दी।

वही विश्वविद्यालय की ओर से दायर याचिका पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि आवेदक ने केवल कार्यालय आदेशों को चुनौती दी हैं।उनका कहना था कि विश्विद्यालय के आदेश को कुलाधिपति के समक्ष चुनौती देने का वैकल्पिक वैधानिक अधिकार हैं। दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत  तथ्यों को सुनने के बाद आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि जब कार्यालय आदेश को चुनौती दी गई हैं ,तो उनके आधार बने प्रबंधन बोर्ड के निर्णय को चुनौती देने का कोई औचित्य नहीं है। कोर्ट ने प्रबंधन बोर्ड के निर्णय 19 सितंबर 2025 के कार्यालय आदेशों को रद्द करते हुए विश्वविद्यालय को दो माह के भीतर आवेदक को निदेशक (प्रसार शिक्षा) के पद पर बहाल करने और सभी लाभों का भुगतान करने का आदेश दिया।