Bihar Land News : पटना हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, 60 साल पुरानी जमाबंदी रद्द करने पर लगाई रोक, अफ़सरों को लगाई कड़ी फटकार
Bihar Land News : पटना हाईकोर्ट ने जमीन विवादों और जमाबंदी रद्द करने के मामले में राज्य सरकार और राजस्व अधिकारियों के मनमाने रवैये पर सख्त रुख अख्तियार किया है।
PATNA : पटना हाईकोर्ट ने बिहार में जमीन रखने वालों के लिए एक बड़ा आदेश दिया हैं। हाईकोर्ट ने सरकार को झटका देते हुए जमाबंदी रद्द करने पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया हें। जस्टिस सौरेनदर पांडेय की एकल पीठ ने 60 साल पुरानी जमाबंदी पर निर्णय देते हुए अधिकारियों के रवैये पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि वे खुद जज बनने की कोशिश न करें।
कोर्ट ने इस मामलें पर आदेश देते हुए जमुई के सीओ, खैरा को तुरंत लगान रसीद काटने का आदेश दिया। कोर्ट ने बिहार में जमीन विवादों और जमाबंदी रद्द करने को लेकर राज्य सरकार और राजस्व अधिकारियों के मनमाने रवैये पर सख्त प्रहार किया है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कह दिया है कि सरकार किसी भी पुरानी जमाबंदी को संक्षिप्त कार्यवाही या तानाशाही तरीके से रद्द नहीं कर सकती। जमुई जिले के खैरा थाना क्षेत्र के निवासी कृष्ण कुमार गोयनका की जमीन की लगान रसीद पिछले 60 वर्षों से नियमित रूप से कट रही थी। लेकिन अचानक राजस्व अधिकारियों ने रसीद काटना बंद कर दिया।
आश्चर्यजनक बात यह रही कि.जब यह मामला हाईकोर्ट में लंबित था, उसी दौरान खैरा के अंचल अधिकारी ने जमाबंदी रद्द करने की सिफारिश कर दी और अपर समाहर्ता ने केस भी शुरू कर दिया। अफसरों की इस तरह हस्तक्षेप पर हाईकोर्ट का गुस्सा फूट पड़ा। हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों को कोई अधिकार नहीं,अगर सरकार को किसी पुरानी जमाबंदी पर कोई आपत्ति है, तो उसे आम नागरिक की तरह सक्षम सिविल कोर्ट जाना होगा। अफसर स्वयं निर्णय नहीं ले सकते।
कोर्ट ने सीओ और एसी की कार्रवाई को अवैध कहा। कोर्ट ने सीओ,खैरा की कार्रवाई की निंदा की और अपर समाहर्ता द्वारा शुरू किए गए रद्दीकरण केस को तुरंत प्रभाव से खारिज कर दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि यदि इस आदेश के बाद भी कोई मनमानी की गई, तो इसे सीधे तौर पर कोर्ट की अवमानना माना जाएगा। कोर्ट ने 1949 का ऐतिहासिक कानून का स्मरण दिलाया। कोर्ट ने अधिकारियों को आईना दिखाते हुए वर्ष 1949 के एक ऐतिहासिक फैसले (किंग बनाम परमानन्द ) का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि जब मामला कोर्ट में चल रहा हो, तो कार्यपालिका को बीच में टांग अड़ाने का कोई अधिकार नहीं है। इस निर्णय के बाद अब बिहार के लाखों जमीन मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी पुरानी जमाबंदियों पर अफसरशाही की तलवार लटकी हुई थी।