पटना हाईकोर्ट में जजों की कमी होगी दूर: कॉलेजियम ने की इन 9 नामों की सिफारिश

पटना हाईकोर्ट में स्वीकृत 53 पदों के मुकाबले 38 न्यायाधीशों के साथ काम कर रहे है. बड़ी संख्या में पद खाली हैं इसको देखेते हुए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पटना हाईकोर्ट के लिए 9 नए जजों के नामों की सिफारिश की है, ताकि जजों की कमी कुछ हद तक दूर होगी

Patna High Court to address shortage of judges Collegium rec
पटना हाईकोर्ट में जजों की कमी होगी दूर: कॉलेजियम ने की 9 नामों की सिफारिश- फोटो : news 4 nation

पटना हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की लंबे समय से चली आ रही कमी को दूर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने एक बड़ा कदम उठाया है। गुरुवार को हुई कॉलेजियम की उच्च स्तरीय बैठक में पटना हाईकोर्ट के लिए 9 नए जजों की नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इन नियुक्तियों के लिए 9 अनुभवी अधिवक्ताओं के नामों का चयन किया गया है, जिससे बिहार की न्यायिक प्रणाली को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

इन 9 अधिवक्ताओं के नामों पर लगी मुहर

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित नामों में मो. नदीम सेराज, रंजन कुमार झा, कुमार मनीष, संजीव कुमार, गिरिजीश कुमार, आलोक कुमार, राज कुमार, राणा विक्रम सिंह और विकाश कुमार शामिल हैं। इन सभी नामों को अब अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा। केंद्र सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद राष्ट्रपति द्वारा इनकी नियुक्ति की आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी, जिसके बाद ये सभी अधिवक्ता न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे।

रिक्त पदों का संकट और आगामी सेवानिवृत्ति

वर्तमान में पटना हाईकोर्ट न्यायाधीशों की भारी कमी से जूझ रहा है। यहाँ जजों के कुल 53 पद स्वीकृत हैं, लेकिन अभी केवल 38 न्यायाधीश ही कार्यरत हैं। चिंता की बात यह है कि इस वर्ष मुख्य न्यायाधीश एस.के. साहू सहित तीन और न्यायाधीश सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे में यदि ये 9 नियुक्तियां हो भी जाती हैं, तब भी स्वीकृत पदों के मुकाबले रिक्तियों का आंकड़ा काफी बड़ा बना रहेगा, जो न्यायिक प्रशासन के लिए एक चुनौती है।

न्यायिक प्रक्रिया में तेजी और लंबित मामलों का बोझ

जजों की कम संख्या का सीधा असर मुकदमों की सुनवाई और न्याय मिलने की गति पर पड़ रहा है। स्वीकृत पदों के मुकाबले लगभग आधे जजों के साथ काम करने के कारण पटना हाईकोर्ट पर लंबित केसों का भार लगातार बढ़ता जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इन 9 नए जजों की नियुक्ति के बाद अदालती कार्यवाही में तेजी आएगी और आम जनता को समय पर न्याय मिलने की संभावना बढ़ेगी, जिससे हाईकोर्ट की कार्यक्षमता में सुधार होगा।