पटना हॉस्टल कांड: गिरफ्तार मनीष रंजन का असली चेहरा!

NEET Student Death Case: गिरफ्तार मनीष रंजन का इतिहास कानून को ठेंगे पर रखने वाला रहा है। खरका गांव में गृह प्रवेश के दौरान हुए हर्ष फायरिंग कांड में उसकी संलिप्तता यह साबित करती है कि हथियारों का प्रदर्शन और हिंसा उसके लिए नई बात नहीं है।

पटना हॉस्टल कांड:  गिरफ्तार मनीष रंजन का असली चेहरा!
पटना हॉस्टल कांड: गिरफ्तार मनीष रंजन का असली चेहरा!- फोटो : news 4 nation

पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की मौत और शम्भू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक की गिरफ्तारी ने इस मामले को बेहद गंभीर मोड़ पर खड़ा कर दिया है. गिरफ्तार मनीष रंजन को लेकर अब तमाम खुलासे हो रहे है.मनीष रंजन का इतिहास कानून को ठेंगे पर रखने वाला रहा है. 15 जनवरी दिन गुरुवार को पुलिस ने शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मकान मालिक को गिरफ्तार कर लिया और वर्तमान में यह सलाखों के पीछे है. 

गिरफ्तार मनीष रंजन का असली चेहरा!

मूल रूप से जहानाबाद जिले के मखदूम पुर थाना क्षेत्र के जगपुरा पंचायत के खरका गांव का मूल निवासी है. गाव में भी इस पर गृह प्रवेश के दौरान हुए हर्ष फायरिंग में एक युवक को गोली लगी थी. इस काण्ड में भी मनीष अभियुक्त है. मनीष चन्द्रबंसी उर्फ़ मनीष रंजन का आपराधिक इतिहास रहा है. पुलिस द्वारा शम्भू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक (मनीष रंजन उर्फ मनीष चंद्रवंशी) की गिरफ्तारी इस गुत्थी को सुलझाने की दिशा में पहला बड़ा कदम है। पुलिस की यह कार्रवाई दर्शाती है कि प्रथम दृष्टया हॉस्टल मालिक की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। अब SIT जांच का मुख्य केंद्र यह होगा कि छात्रा की मौत आत्महत्या थी या कोई गहरी साजिश।

आपराधिक इतिहास और वर्तमान कांड का जुड़ाव

मनीष रंजन का इतिहास अपराधों से भरा रहा है, अपने गाव खरका में हर्ष फायरिंग और ऑक्सीजन कालाबाजारी जैसे गंभीर आरोपों के बावजूद उसका खुलेआम घूमना और हॉस्टल चलाना प्रशासन की बड़ी विफलता है। जानकारों का दावा है कि पटना के राजेस्वर हॉस्पिटल में एक छोटा सा कर्मचारी होते हुए इतना बड़ा सम्राज्य बना लिया इसका अपना हॉस्पिटल है जिसके आड़ में गलत कार्यों का अंजाम देता था.

सबसे भयावह खुलासा मनीष के ऑक्सीजन गैस एजेंसी को लेकर है। जिस कोविड आपदा में लोग अपनों की जान बचाने के लिए तड़प रहे थे, मनीष रंजन ने उस मजबूरी को 'मुनाफे का अवसर' बनाया और देखते ही देखते महज कुछ वर्षों में करोड़पति तक सफ़र तय कर लिया. राजेश्वर हॉस्पिटल जैसे संस्थान में एक मामूली कर्मचारी के रूप में शुरुआत करने वाला व्यक्ति आज करोड़ों के हॉस्पिटल और हॉस्टल का मालिक कैसे बन गया? यह मनीष रंजन की आर्थिक जांच (ED/EOU) का मुख्य बिंदु होना चाहिए ऐसा कहना है स्थानीय लोगो का