30 साल बाद पटना कोतवाली थाना परिसर में नहीं हुई जुमे की नमाज, कोतवाली मस्जिद से जुड़ा है विवाद

पटना के कोतवाली थाना परिसर में तीन दशकों के बाद जुम्मे की नमाज पर लोग नहीं आये. यह सब एक शिकायत के बाद जिसमें थाना परिसर को धार्मिक क्रियाकलापों से मुक्त रखने और इससे होने वाली परेशानी का जिक्र किया गया था

कोतवाली थाना परिसर में नमाज
कोतवाली थाना परिसर में नमाज - फोटो : news4nation

Patna Kotwali masjid : राजधानी पटना के ऐतिहासिक कोतवाली थाना परिसर में करीब 30 वर्षों बाद ऐसा पहली बार हुआ, जब शुक्रवार को जुमे की नमाज थाना परिसर में अदा नहीं की गई। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कोतवाली मस्जिद में नमाज पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगाई गई है। केवल थाना परिसर के भीतर नमाज अदा करने की व्यवस्था समाप्त की गई है, ताकि पुलिस के कामकाज, सुरक्षा व्यवस्था और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो।


जानकारी के अनुसार, यह फैसला 'सहयोग पोर्टल' पर दर्ज एक शिकायत के बाद लिया गया। बुद्धा कॉलोनी निवासी प्रभास चंद्र शर्मा ने शिकायत में कहा था कि हर शुक्रवार को थाना परिसर में बड़ी संख्या में लोग नमाज अदा करने पहुंचते हैं, जिससे पुलिस के प्रशासनिक कार्यों और परिसर में आवागमन में बाधा उत्पन्न होती है।

ऐसे हुआ निर्णय 

शिकायत मिलने के बाद एडीशनल एसपी कृष्ण मुरारी प्रसाद ने कोतवाली थाना से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। इसके बाद 2 जून को कोतवाली थाना में एडीशनल एसपी, थाना प्रभारी अजय कुमार, मस्जिद के इमाम, मस्जिद कमेटी के प्रतिनिधियों और अन्य स्थानीय लोगों के साथ बैठक हुई। बैठक में सभी पक्षों के बीच चर्चा के बाद सहमति बनी कि आगे से जुमे की नमाज के दौरान थाना परिसर का उपयोग नहीं किया जाएगा। बैठक के दो दिन बाद 4 जून को थाना की ओर से रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजी गई। इसी रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू की, जिसके तहत शुक्रवार को पहली बार थाना परिसर में नमाज नहीं हुई।


कोतवाली थाना परिसर स्थित ऐतिहासिक मस्जिद

बताया जाता है कि कोतवाली थाना परिसर स्थित ऐतिहासिक मस्जिद में वर्षों से जुमे की नमाज के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते थे। भीड़ अधिक होने पर नमाजी मस्जिद से निकलकर थाना परिसर तक फैल जाते थे। इससे सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस के दैनिक कार्यों पर असर पड़ने की शिकायतें सामने आती रही थीं।


कोतवाली थाना प्रभारी और मस्जिद के इमाम ने भी पुष्टि की है कि यह निर्णय आपसी सहमति से लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मस्जिद में नियमित नमाज पहले की तरह जारी रहेगी, केवल थाना परिसर के भीतर नमाज अदा नहीं की जाएगी।

 

तीन दशक से चली आ रही व्यवस्था

करीब तीन दशक से चली आ रही व्यवस्था में बदलाव के कारण यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। सार्वजनिक परिसरों में धार्मिक गतिविधियों और प्रशासनिक व्यवस्था के संतुलन को लेकर भी बहस शुरू हो गई है। हालांकि, पुलिस प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय किसी धार्मिक गतिविधि पर रोक लगाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि सुरक्षा, प्रशासनिक सुविधा और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए सभी संबंधित पक्षों की सहमति से लिया गया है।