एक मिनट में होगी जमीन रजिस्ट्री, नहीं चलेगी 'सेटिंग': OTP सिस्टम ने बिचौलियों को किया बाहर, लेकिन तकनीकी पेंच में उलझ गए खरीदार-विक्रेता

जमीन और फ्लैट की रजिस्ट्री को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने अब ओटीपी (OTP) सिस्टम अनिवार्य कर दिया है। यह ओटीपी केवल एक मिनट के लिए मान्य होता है। इस बदलाव से सबसे ज्यादा परेशानी उन बिचौलियों को हो रही है जो सेवा शुल्क लेकर रजिस्ट्

एक मिनट में होगी जमीन रजिस्ट्री, नहीं चलेगी 'सेटिंग': OTP सि

Patna - जमीन और फ्लैट की रजिस्ट्री को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने अब ओटीपी (OTP) सिस्टम अनिवार्य कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत अब एनजीडीआरएस (NGDRS) पोर्टल पर ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग के दौरान खरीदार और विक्रेता के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर वन टाइम पासवर्ड भेजा जा रहा है। यह ओटीपी केवल एक मिनट के लिए मान्य होता है। इस बदलाव से सबसे ज्यादा परेशानी उन बिचौलियों को हो रही है जो सेवा शुल्क लेकर रजिस्ट्री कराते थे, जबकि पारदर्शिता बढ़ने से आम लोग अब सीधे समय और तिथि की जानकारी पा रहे हैं।

किसानों का डर और तकनीकी खामी बन रही बाधा 

ओटीपी सिस्टम लागू होने के बाद निबंधन कार्यालयों में काम की गति धीमी हो गई है। पटना में हर दिन रजिस्ट्री के लिए पहुँचने वाले 50-60 लोगों में से केवल 10 से 15 लोगों का ही काम हो पा रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि उद्योग के लिए जमीन बेचने वाले ग्रामीण क्षेत्रों के किसान साइबर ठगी के डर से ओटीपी साझा करने में हिचक रहे हैं। यदि एक मिनट के भीतर ओटीपी दर्ज नहीं किया गया, तो पूरी स्लॉट बुकिंग प्रक्रिया दोबारा करनी पड़ती है, जिससे काफी समय बर्बाद हो रहा है।

MVR बढ़ने का खौफ: रजिस्ट्री कराने वालों की उमड़ी भीड़ 

सरकार ने 12 वर्षों के बाद जनवरी 2026 से मिनिमम वैल्यू रजिस्टर (MVR) में 200 से 300 प्रतिशत तक की वृद्धि की घोषणा की है। हालांकि यह अभी लागू नहीं हुई है, लेकिन बाजार भाव और विकास परियोजनाओं को देखते हुए स्टाम्प ड्यूटी और निबंधन शुल्क बढ़ने का डर लोगों में साफ दिख रहा है। यही कारण है कि वित्तीय वर्ष के अंतिम दो महीनों में रजिस्ट्री कार्यालयों में भारी भीड़ उमड़ रही है, लोग पुरानी दरों पर ही अपनी रजिस्ट्री पूरी कर लेना चाहते हैं।

राजस्व लक्ष्य पर मंडराया संकट 

निबंधन कार्यालय के कर्मचारियों के अनुसार, नई प्रक्रिया के कारण प्रतिदिन होने वाली रजिस्ट्री की औसत संख्या 30-35 से घटकर महज 10-15 रह गई है। इस गिरावट का सीधा असर राजस्व वसूली पर पड़ सकता है। पटना जिले के लिए इस वर्ष का राजस्व लक्ष्य 1500 करोड़ रुपये है, जिसमें अकेले पटना सदर का हिस्सा 725 करोड़ रुपये है। अधिकारियों का मानना है कि यदि रजिस्ट्री की रफ्तार यही रही, तो लक्ष्य हासिल करना चुनौतीपूर्ण होगा।

अधिकारियों का पक्ष: सुरक्षित भविष्य के लिए नई पहल 

पटना के सब रजिस्ट्रार रवि रंजन के अनुसार, ओटीपी आधारित व्यवस्था अभी नई है, इसलिए लोगों को सामंजस्य बिठाने में थोड़ी दिक्कत आ रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कुछ ही दिनों में लोग इस सुरक्षित और पारदर्शी प्रक्रिया के अभ्यस्त हो जाएंगे। उनका कहना है कि इस व्यवस्था से खरीदारों को दफ्तरों के अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और उन्हें मोबाइल पर ही सही जानकारी मिल जाएगी।