शंभू गर्ल्स हॉस्टल केस: 15 दिन में क्या किया? मनीष रंजन की जमानत पर सुनवाई के दौरान CBI की बोलती बंद

शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में शनिवार को अदालत में हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। करीब ढाई घंटे चली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सीबीआई की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा कि मामले में अब तक पॉक्सो एक्ट क्यों न

शंभू गर्ल्स हॉस्टल केस: 15 दिन में क्या किया? मनीष रंजन की ज

Patna - पटना के चर्चित शंभू गर्ल्स हॉस्टल नीट छात्रा मौत मामले में मुख्य आरोपी मनीष रंजन को आज भी अदालत से राहत नहीं मिल सकी। शनिवार को कोर्ट में करीब ढाई घंटे तक चली लंबी बहस के बाद मामले की सुनवाई 2 मार्च तक के लिए टाल दी गई है। सुनवाई के दौरान सीबीआई (CBI) की पूरी टीम अदालत में मौजूद रही, लेकिन एजेंसी के तर्कों और अब तक की प्रगति से कोर्ट संतुष्ट नजर नहीं आया। 

सीबीआई को कोर्ट की फटकार: पॉक्सो एक्ट न लगाने पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने सीबीआई की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए और जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने जांच एजेंसी से सीधा सवाल किया कि इस संवेदनशील मामले में अब तक पॉक्सो (POCSO) एक्ट क्यों नहीं लगाया गया है? अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सीबीआई के पास फिलहाल केवल 'अटेम्प्ट टू मर्डर' (धारा 307) का मामला है, जो मूल घटना की गंभीरता के अनुरूप प्रतीत नहीं होता। कोर्ट ने एजेंसी से स्पष्ट जवाब मांगा है कि आखिर किन आधारों पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। 

जांच की सुस्त रफ्तार पर नाराजगी और मनीष रंजन की कस्टडी पर बहस

अदालत ने सीबीआई से पूछा कि पिछले 15 दिनों की जांच के दौरान मनीष रंजन को लेकर क्या ठोस तथ्य सामने आए हैं? कोर्ट ने तीखे लहजे में पूछा, "क्या आपको वाकई मनीष रंजन की जरूरत है? जब आपके केस में पॉक्सो एक्ट ही नहीं है, तो आरोपी अब तक जेल में क्यों है?" अदालत ने यह भी स्पष्ट करने को कहा कि यदि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत या जांच की आवश्यकता नहीं है, तो उसे अवैध रूप से जेल में रखने का क्या औचित्य है। 

एसआईटी का पक्ष: "प्रभावशाली होने के कारण हुई थी गिरफ्तारी"

इस मामले की पूर्व में जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने भी अदालत में अपना पक्ष रखा। एसआईटी के प्रतिनिधियों ने कहा कि मनीष रंजन एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं, जिसे देखते हुए पूर्व में उनकी गिरफ्तारी की गई थी। हालांकि, एसआईटी ने अब स्पष्ट कर दिया है कि चूंकि केस अब सीबीआई के पास है, इसलिए उन्हें अब मनीष रंजन की कस्टडी की आवश्यकता नहीं है। इस बयान के बाद आरोपी की जमानत की संभावनाओं पर बहस और तेज हो गई है।  

परिजनों की न्याय के लिए गुहार और केस का घटनाक्रम

कोर्ट रूम में मौजूद मृत छात्रा की मां ने भावुक होते हुए न्यायाधीश से न्याय की गुहार लगाई। गौरतलब है कि इस मामले की जांच 17 जनवरी तक रौशनी (पुलिस अधिकारी) द्वारा की जा रही थी, जिसके बाद इसे एसआईटी को सौंपा गया। 12 फरवरी को सीबीआई ने इस मामले में केस दर्ज कर अपनी तफ्तीश शुरू की थी। अब सभी की निगाहें 2 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहाँ सीबीआई को कोर्ट के सवालों का लिखित जवाब देना होगा।

रिपोर्ट - अनिल कुमार