NTPC बाढ़ के काले राख के काले धंधे से गोरे और मालामाल हो रहे हैं एंट्री माफिया ओर परिवहन के अधिकारी...गोरखधंधे में कई लोग शामिल...
Bihar News : बाढ़ NTPC से फ्लाई ऐश (राख) लेकर निकलने वाले सैकड़ों ओवरलोडेड ट्रक और हाइवा चौबीसों घंटे सड़कों को रौंदते हुए राजधानी की छाती से गुजर रहे हैं।खुलेआम सड़कों पर कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और परिवहन विभाग मौन साधे बैठा है...
Patna : राजधानी पटना के बाढ़ NTPC क्षेत्र में इन दिनों बिहार सरकार के नियमों का नहीं, बल्कि 'एंट्री माफिया' का समानांतर साम्राज्य चल रहा है। बाढ़ NTPC से फ्लाई ऐश (राख) लेकर निकलने वाले सैकड़ों ओवरलोडेड ट्रक और हाइवा चौबीसों घंटे सड़कों को रौंदते हुए राजधानी की छाती से गुजर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इन अवैध गाड़ियों को रोकने के बजाय जिला प्रशासन और परिवहन विभाग के अधिकारियों ने अपनी आंखें और कान बंद कर लिए हैं। खुलेआम सड़कों पर कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और विभाग मौन साधे बैठा है।
जिलेवार रेट चार्ट फिक्स
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इन ओवरलोडेड वाहनों को सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाने के लिए एंट्री माफियाओं ने बाकायदा एक 'रेट चार्ट' तैयार किया है। अवैध वसूली का यह खेल जिला वार चलता है, जिसमें पटना के लिए 25,000 रुपये, वैशाली के लिए 16,000 रुपये और मुजफ्फरपुर के लिए 15,000 रुपये प्रति गाड़ी वसूल किए जाते हैं। इस काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा परिवहन विभाग के कथित भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच बंदरबांट किया जाता है, जिसके बदले माफियाओं को सड़कों पर 'फ्री पास' की गारंटी मिलती है।
माफियाओं के सिंडिकेट का पर्दाफाश
इस करोड़ों के काले खेल में सबसे बड़ा नाम नालंदा जिले के निवासी 'गोप जी' का सामने आ रहा है। बताया जाता है कि गोप जी ही वह मुख्य कड़ी है जो पटना, वैशाली और मुजफ्फरपुर के परिवहन अधिकारियों से लेकर मोबाइल दरोगा तक पैसा और गाड़ी नंबर पहुंचाने का जिम्मा संभालता है। सूत्रों का दावा है कि इस सिंडिकेट में रवि, सुजीत, संतोष और राजकिशोर जैसे लोग नीचे के स्तर पर काम करते हैं। वहीं, परिवहन विभाग की ओर से एक मोबाइल दरोगा और उनके ड्राइवरों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है, जिनके मोबाइल रिकॉर्ड खंगालने पर बड़े राज खुल सकते हैं।
DTO की सफाई और जमीनी हकीकत
इस पूरे मामले पर जब पटना DTO उपेंद्र पाल से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि बाढ़ NTPC से चलने वाली ओवरलोडेड गाड़ियों पर लगाम कसने के लिए शिफ्ट के अनुसार चार मोबाइल दरोगाओं की ड्यूटी लगाई गई है। नियमतः हर दिन हुई कार्रवाई और जुर्माने की रिपोर्ट SDM बाढ़ और DTO पटना को देनी होती है। हालांकि, अधिकारी के दावों और जमीनी हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है। सवाल खड़ा होता है कि अगर अधिकारी मुस्तैद हैं, तो फिर ये ओवरलोडेड ट्रक बिना किसी डर के राजधानी की सड़कों पर कैसे दौड़ रहे हैं और कार्रवाई फाइलों तक ही क्यों सिमटी हुई है?
सड़कों की बर्बादी और सुरक्षा पर संकट
ओवरलोडेड ट्रकों के इस बेखौफ संचालन से न केवल बिहार सरकार के राजस्व को करोड़ों का चूना लग रहा है, बल्कि अरबों की लागत से बनी सड़कें भी समय से पहले दम तोड़ रही हैं। फ्लाई ऐश लदे ये ट्रक न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं का सबब भी बन रहे हैं। एंट्री माफिया और विभागीय मिलीभगत के इस गठजोड़ ने आम जनता की सुरक्षा को ताक पर रख दिया है। अब देखना यह है कि क्या राजधानी की नाक के नीचे चल रहे इस सिंडिकेट पर सरकार का 'बुलडोजर' चलता है या भ्रष्टाचार का यह 'अवैध सम्राट' ऐसे ही कायम रहेगा।
धीरज परासर की रिपोर्ट