Bihar Rapid Rail: पटना से गया- आरा-बेगूसराय और मुजफ्फरपुर तक हाई-स्पीड सफर, अब बदलेगी बिहार की रफ्तार, रैपिड रेल से जानिए कैसे बदलेगी बदलेगी आपकी यात्रा

Bihar Rapid Rail:बिहार सरकार ने विकास और आधुनिक बुनियादी ढांचे को नई रफ़्तार देने के उद्देश्य से एक बड़ा सियासी और प्रशासनिक फैसला लिया है। ...

Rapid Rail to Transform Travel Across Bihar
अब बदलेगी बिहार की रफ्तार- फोटो : social Media

Bihar Rapid Rail:बिहार सरकार ने विकास और आधुनिक बुनियादी ढांचे को नई रफ़्तार देने के उद्देश्य से एक बड़ा सियासी और प्रशासनिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में चार रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम  कॉरिडोर को मंजूरी देकर सरकार ने प्रदेश के परिवहन ढांचे में बड़ा बदलाव लाने का ऐलान किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत पटना, गया, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय और आरा जैसे प्रमुख शहर हाई-स्पीड रैपिड रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे। इसे सरकार विकास, निवेश और रोजगार के नए दौर की बुनियाद के रूप में पेश कर रही है।

कैबिनेट ने पटना–गयाजी, पटना एयरपोर्ट–बेगूसराय, पटना–हाजीपुर–प्रस्तावित सोनपुर एयरपोर्ट–मुजफ्फरपुर और पटना एयरपोर्ट–आरा कॉरिडोर के लिए अल्टरनेटिव एनालिसिस रिपोर्ट  और डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कराने को मंजूरी दी है। इस कार्य के लिए 31.59 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। परियोजना का खाका तैयार करने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम को सौंपी गई है, जिसने दिल्ली मेरठ 'नमो भारत' रैपिड रेल परियोजना को भी विकसित किया है।

सरकार का दावा है कि रैपिड रेल शुरू होने के बाद इन शहरों के बीच यात्रा का समय लगभग दो-तिहाई तक कम हो जाएगा। एनसीआरटीसी यह तय करेगा कि किन मार्गों पर एलिवेटेड ट्रैक अधिक उपयुक्त होंगे और कहां अंडरग्राउंड सिस्टम विकसित किया जाएगा। डीपीआर तैयार होने के बाद परियोजना की लागत, स्टेशनों की संख्या, रूट और निर्माण की समय-सीमा स्पष्ट होगी।

विशेष रूप से पटना–गया कॉरिडोर को राज्य के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय धार्मिक और पर्यटन नगरी गया तक तेज़ और आधुनिक कनेक्टिविटी मिलने से पर्यटन, व्यापार, निवेश और स्थानीय रोजगार को नई रफ़्तार मिलने की उम्मीद है। नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और रोज़ाना सफर करने वाले यात्रियों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।

आरआरटीएस एक सेमी हाई-स्पीड रेल प्रणाली है, जिसकी डिज़ाइन स्पीड 180 किलोमीटर प्रति घंटा और परिचालन गति 160 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है। हर 5 से 15 मिनट के अंतराल पर ट्रेन उपलब्ध कराने की योजना है। इसके स्टेशन रेलवे, मेट्रो और बस अड्डों से जुड़े होंगे, जिससे यात्रियों को निर्बाध मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट सुविधा मिलेगी।

राजनीतिक तौर पर भी इस फैसले को अहम माना जा रहा है। विधानसभा चुनाव से पहले सरकार विकास और आधारभूत संरचना को अपनी सबसे बड़ी सियासी ताकत के रूप में पेश करना चाहती है। यदि यह परियोजना तय समय पर ज़मीन पर उतरती है, तो यह केवल परिवहन व्यवस्था नहीं बदलेगी, बल्कि बिहार की आर्थिक दिशा, निवेश का माहौल और विकास की राजनीति को भी नई पहचान दे सकती है।