प्रशांत किशोर इस दिन करेंगे बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से नामांकन, उप चुनाव में भाजपा के गढ़ में जन सुराज की बड़ी तैयारी

प्रशांत किशोर देश के जाने-माने चुनावी रणनीतिकार रहे हैं। बांकीपुर उपचुनाव को जन सुराज के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई माना जा रहा है।

Prashant Kishor in Bankipur Assembly Bypoll
Prashant Kishor in Bankipur Assembly Bypoll- फोटो : news4nation

Prashant Kishor :  बिहार की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल बांकीपुर उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी लगातार बढ़ती जा रही है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर 13 जुलाई 2026 को सुबह 10 बजे बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। उनके नामांकन को लेकर जन सुराज ने व्यापक तैयारी शुरू कर दी है और बड़ी संख्या में समर्थकों के जुटने की संभावना जताई जा रही है।


प्रशांत किशोर देश के जाने-माने चुनावी रणनीतिकार रहे हैं। कई राज्यों में राजनीतिक दलों के लिए चुनावी रणनीति तैयार करने के बाद उन्होंने बिहार में जन सुराज अभियान की शुरुआत की, जिसे बाद में राजनीतिक दल का स्वरूप दिया गया। अब वह पहली बार सीधे विधानसभा चुनाव के मैदान में उतरकर अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता की परीक्षा देने जा रहे हैं। बांकीपुर उपचुनाव को जन सुराज के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई माना जा रहा है।

 

त्रिकोणीय मुकाबला 

बांकीपुर सीट पर मुकाबला इस बार त्रिकोणीय होने जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने संगठन के पुराने और सक्रिय नेता अभिषेक कुमार 'बंटी' को उम्मीदवार बनाया है। करीब 26 वर्षों से भाजपा और भारतीय जनता युवा मोर्चा से जुड़े अभिषेक कुमार संगठन में मंडल स्तर से लेकर प्रदेश उपाध्यक्ष तक की जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। पार्टी को उनकी मजबूत संगठनात्मक पकड़ और क्षेत्र में सक्रियता पर भरोसा है। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल ने रेखा गुप्ता को चुनाव मैदान में उतारा है। ऐसे में भाजपा, राजद और जन सुराज के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है।


1995 से भाजपा का मजबूत गढ़ 

बांकीपुर विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास भाजपा के पक्ष में रहा है। वर्ष 1995 से यह सीट भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती है। पिछले तीन दशकों में भाजपा लगातार इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने में सफल रही है। ऐसे में प्रशांत किशोर के सामने न केवल अपना राजनीतिक प्रभाव साबित करने की चुनौती होगी, बल्कि भाजपा के लंबे समय से चले आ रहे विजय अभियान को रोकने की भी बड़ी परीक्षा होगी।


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजधानी पटना की यह हाई-प्रोफाइल सीट इस बार पूरे बिहार की राजनीति का केंद्र बनी हुई है। एक ओर भाजपा अपनी परंपरागत सीट बचाने की कोशिश करेगी, वहीं जन सुराज के लिए यह चुनाव पार्टी के भविष्य और प्रशांत किशोर की राजनीतिक ताकत का अहम परीक्षण माना जा रहा है। दूसरी ओर राजद भी इस मुकाबले को त्रिकोणीय बनाकर चुनावी समीकरण बदलने की कोशिश में जुटी है। ऐसे में 13 जुलाई को होने वाला प्रशांत किशोर का नामांकन इस उपचुनाव के अभियान को नई गति दे सकता है।