परिवहन विभाग में भ्रष्ट अफसरों और कर्मचारियों को पहले प्रमोशन,अब ट्रांसफर पोस्टिंग के लिए लगाई जा रही बोली, माल छोड़ो मालदार पोस्टिंग लो! सम्राट की सरकार करेगी प्रहार

बिहार परिवहन विभाग में ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर चर्चाएं तेज हैं और मनचाही तैनाती के लिए लॉबिंग के आरोप भी जारी है. सूत्रों यहाँ तक कहते हैं कि माल छोड़ो मालदार पोस्टिंग लो की तर्ज पर सेटिंग करने वालों से निपटना सीएम सम्राट की बड़ी चुनौती है

Bihar Transport Department
Bihar Transport Department- फोटो : news4nation

Bihar Transport Department : बिहार के परिवहन विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म है। विभाग में हर वर्ष जून महीने के दौरान बड़े पैमाने पर स्थानांतरण और पदस्थापन की प्रक्रिया होती है। इस बार भी कई अधिकारियों के तबादले की संभावना जताई जा रही है, लेकिन इसके साथ ही मनचाही पोस्टिंग हासिल करने के लिए लॉबिंग और कथित तौर पर बोली लगाए जाने की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। 


विभागीय सूत्रों के अनुसार, परिवहन सेवा से जुड़े कुछ अधिकारी और कर्मचारी अपनी पसंद के जिलों में पदस्थापन के लिए सक्रिय हो गए हैं। बताया जा रहा है कि ऐसे कई अधिकारी, जिन पर पहले विभिन्न प्रकार के आरोप लग चुके हैं या जिनके खिलाफ जांच हुई है, वे भी महत्वपूर्ण और राजस्व वाले जिलों में पोस्टिंग के लिए प्रयासरत हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


सूत्रों का कहना है कि विभाग में हाल ही में प्रोन्नत हुए कुछ अधिकारियों के बीच भी बड़े और प्रभावशाली जिलों में पदस्थापन को लेकर प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है। यहां तक कि यह चर्चा भी है कि कुछ अधिकारियों ने आपसी स्तर पर यह तय करने की कोशिश की है कि किसे किस जिले में जाना है। ऐसे दावों ने स्थानांतरण प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का मानना है कि परिवहन विभाग लंबे समय से राजस्व संग्रह और प्रवर्तन से जुड़े कार्यों के कारण संवेदनशील विभाग माना जाता रहा है। यही वजह है कि यहां की पोस्टिंग को लेकर हमेशा विशेष रुचि देखी जाती है। अतीत में भी विभाग में ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर विवाद और आरोप सामने आते रहे हैं।


सरकार की निगरानी में प्रक्रिया

सूत्रों के मुताबिक, राज्य के 38 जिलों में परिवहन व्यवस्था के लिए इस बार भी अधिकारियों की नई तैनाती की जाएगी। बताया जा रहा है कि करीब आधे जिलों में बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जा सकती है, जबकि शेष पदों पर परिवहन सेवा के अधिकारियों की तैनाती होगी। इसी बीच सरकार और विभागीय नेतृत्व की नजर पूरी प्रक्रिया पर बनी हुई है। प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि यदि कार्यकाल पूरा नहीं करने वाले, नए या विवादित छवि वाले अधिकारियों को महत्वपूर्ण और संवेदनशील जिलों में तैनाती मिलती है तो इसे लेकर सवाल उठ सकते हैं।


सम्राट सरकार के लिए बड़ी चुनौती 

ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार इस बार ट्रांसफर-पोस्टिंग प्रक्रिया को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत सकती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगामी स्थानांतरण सूची में किन अधिकारियों को जिम्मेदारी मिलती है और सरकार पारदर्शिता बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाती है। यहाँ तक की मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार के सामने भी यह एक बड़ी चुनौती की तरह है की वे भ्रष्ट्राचार के लिए बदनाम रहे परिवहन विभाग में ट्रांसफर-पोस्टिंग की प्रक्रिया को त्रुटिहीन और बिना किसी हस्तक्षेप के कराने में कैसे सफल होते हैं। राज्य के इस सबसे मलाईदार विभाग के रूप में बदनाम हो चुके महकमे में ट्रांसफर-पोस्टिंग में खेल न हो इस पर सबकी नजर है।