Bihar Politics: सीएम नीतीश से जबरन दिलाया इस्तीफा ! हस्ताक्षर पर उठे सवाल, राबड़ी के 'भाई' ने घेरा
Bihar Politics: बिहार की राजनीति के लिए आज का दिन अहम है। सीएम नीतीश ने सोमवार को एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया है। सीएम नीतीश के इस्तीफे के बाद सियासी भूचाल आ गई है। सत्ता पक्ष के नेता जहां एक ओर भावुक बयान दे रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे भाजपा की साजिश करार दे रही है। वहीं अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल के एमएलसी और राबड़ी देवी के मुंह बोले भाई सुनील कुमार ने इस्तीफे पर सवाल उठाते हुए सिग्नेचर की जांच की मांग की है।
सुनील कुमार ने उठाया सवाल
सुनील कुमार ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “छोटे पद का भी इस्तीफा अधिकृत व्यक्ति के सामने दिया जाता है, ऐसे में इस मामले की जांच होनी चाहिए कि हस्ताक्षर असली हैं या नकली।” सीएम नीतीश के इस्तीफे के बाद विपक्ष की ओर से दावा किया जा रहा है कि सीएम नीतीश से जबरदस्ती इस्तीफा लिया गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी दावा किया कि बीजेपी ने सीएम नीतीश पर दवाब डालकर इस्तीफा लिया है। वहीं अब राजद की ओर से हस्ताक्षर पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
एमएलसी पद से दिया इस्तीफा
मालूम हो कि, सोमवार को नीतीश कुमार ने बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया, जिसे सभापति ने स्वीकार कर लिया। वहीं, नितिन नवीन ने भी विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दिया। दोनों नेताओं के 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने की संभावना जताई जा रही है। इस्तीफे से पहले रविवार को पूरे दिन राजनीतिक हलचल बनी रही। इस दौरान कई अहम बैठकों का दौर चला, जिसमें संजय झा, ललन सिंह और विजय चौधरी समेत अन्य नेता शामिल हुए। बैठकों में जेडीयू के भविष्य और राजनीतिक रणनीति पर चर्चा हुई।
सिग्नेचर में बदलाव पर उठे सवाल
इस्तीफा पत्र सामने आने के बाद नीतीश कुमार के हस्ताक्षर को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। दावा किया जा रहा है कि उनके सिग्नेचर पहले की तुलना में अलग दिख रहे हैं। इस बार उन्होंने अपना नाम पूरी तरह हिंदी (देवनागरी) में “नीतीश कुमार” के रूप में लिखा है, जो पहले की शैली से अलग बताया जा रहा है। जानकारों के मुताबिक, पहले उनके हस्ताक्षर में हिंदी और उर्दू (फारसी) का मिश्रण होता था। वे अपने नाम का पहला हिस्सा हिंदी में और सरनेम उर्दू शैली में लिखते थे।
2025 से दिख रहा बदलाव
रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 से उनके हस्ताक्षर के तरीके में बदलाव देखा जा रहा है। दिसंबर 2025 में संपत्ति घोषणा और राज्यसभा नामांकन के दौरान भी उन्होंने केवल हिंदी में साइन किया था। इससे पहले वे ज्यादातर दस्तावेजों में हिंदी-उर्दू मिश्रित हस्ताक्षर करते थे। सूत्रों के मुताबिक, बढ़ती उम्र के कारण हस्ताक्षर में बदलाव संभव है। हालांकि, विपक्ष इस मुद्दे को लेकर जांच की मांग कर रहा है, जिससे आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक विवाद और बढ़ सकता है।