पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर राहुल गांधी का हमला, NEET छात्रा हत्याकांड में आवाज उठाने पर नीतीश सरकार ने कराया गिरफ्तार

बेटी के लिए न्याय की आवाज़ बनकर साथी सांसद पप्पू यादव जी मजबूती से खड़े हुए। आज उनकी गिरफ्तारी साफ़ तौर पर राजनीतिक प्रतिशोध है ताकि जवाबदेही माँगने वाली हर आवाज़ को डराया और दबाया जा सके।

Rahul Gandhi attacks Pappu Yadavs arrest
Rahul Gandhi attacks Pappu Yadavs arrest - फोटो : news4nation

Pappu Yadav: पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इसे लेकर शनिवार को बिहार की नीतीश सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने सोशल मीडिया पर पप्पू यादव के पक्ष में आवाज बुलंद करते हुए लिखा है कि NEET की आकांक्षी छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत और उसके बाद की पूरी कार्रवाई ने एक बार फिर सिस्टम की गहरी सड़ांध को उजागर कर दिया है। पीड़ित परिवार ने जब निष्पक्ष जाँच और न्याय की माँग की, तो वही पुराना भाजपा-NDA मॉडल सामने आ गया कैस को भटकाओं, परिजनों को प्रताड़ित करो और अपराधियों को सत्ता का संरक्षण दो। 


वे आगे लिखते हैं कि इस बेटी के लिए न्याय की आवाज़ बनकर साथी सांसद पप्पू यादव जी मजबूती से खड़े हुए। आज उनकी गिरफ्तारी साफ़ तौर पर राजनीतिक प्रतिशोध है ताकि जवाबदेही माँगने वाली हर आवाज़ को डराया और दबाया जा सके। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि यह घटना किसी एक मामले तक सीमित नहीं दिखती। यह एक भयावह साज़िश और खतरनाक पैटर्न की ओर इशारा करती है, जहाँ और भी बेटियाँ शिकार बन रही हैं और सत्ता इस खौफ़नाक सच्चाई से आँखे मूँद कर बैठी है। यह राजनीति नहीं, इंसाफ़ का सवाल है। यह बिहार की बेटी की इज़्ज़त और सुरक्षा का सवाल है।


क्या है मामला जिसमें गिरफ्तार हुए पप्पू

शास्त्री नगर थाने में वर्ष 1995 में कांड संख्या 552/1995 (GR संख्या 775/03) दर्ज की गई थी। इस मामले में 30 अप्रैल 1996 को कोर्ट ने संज्ञान लिया था और 11 सितंबर 1998 को आरोप भी तय कर दिए गए थे। बावजूद इसके, बार-बार समन जारी होने के बाद भी पप्पू यादव और दो अन्य आरोपित अदालत में पेश नहीं हो रहे थे, जिसके कारण अब उनकी गिरफ्तारी हुई है।


मामले की पृष्ठभूमि वर्ष 1994 की है। उसी वर्ष पप्पू यादव पहली बार सांसद बने थे। आरोप है कि पटना में कार्यालय खोलने के उद्देश्य से उन्होंने एक मकान को किराए पर रहने के नाम पर लिया, लेकिन बाद में उसी मकान में अपना राजनीतिक कार्यालय संचालित करने लगे। मकान मालिक मनोज बिहारी लाल का आरोप है कि रोज़ाना सैकड़ों लोगों की आवाजाही से उन्हें भारी परेशानी होने लगी। जब उन्होंने मकान खाली करने को कहा तो ऐसा नहीं किया गया, जिसके बाद वे अदालत की शरण में पहुंचे।


इस केस में पप्पू यादव के अलावा शैलेंद्र प्रसाद और चंद्र नारायण प्रसाद को भी आरोपी बनाया गया है, जिन पर मकान किराए पर लेने की प्रक्रिया में शामिल होने का आरोप है। इसके अलावा आरोप यह भी है कि जिस अपार्टमेंट के पांचवें तल्ले पर पप्पू यादव का आवास है, उसकी छत पर उन्होंने अवैध रूप से अपनी पार्टी (जन अधिकार पार्टी, जो अब कांग्रेस में विलीन हो चुकी है) का कार्यालय बना रखा है, जो 1994 से संचालित बताया जा रहा है। अपार्टमेंट के अन्य किरायेदारों का कहना है कि लगातार होने वाली भीड़ और आवाजाही से उन्हें लंबे समय से परेशानी झेलनी पड़ रही है। आवासीय मकान को कथित रूप से व्यावसायिक और राजनीतिक कार्यालय के रूप में इस्तेमाल करने से जुड़े इसी लंबे समय से लंबित मामले में अब पप्पू यादव की गिरफ्तारी हुई है।