Bihar Vidhan Sabha Foundation Day:'देश में सदनों की मर्यादा गिर रही है'... बिहार के लोकतंत्र की इमारत से ओम बिड़ला की दो टूक
Bihar Vidhan Sabha Foundation Day:बिहार की सियासी फ़ज़ा आज इतिहास, परंपरा और भविष्य की उम्मीदों से सराबोर दिखी, जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने “सशक्त विधायक–सशक्त लोकतंत्र” विषय पर खुल कर बोला।....
Bihar Vidhan Sabha Foundation Day: बिहार की सियासी फ़ज़ा आज इतिहास, परंपरा और भविष्य की उम्मीदों से सराबोर दिखी, जब बिहार विधानसभा के स्थापना दिवस पर संयुक्त सदन की कार्यवाही का आग़ाज़ हुआ। लोकतंत्र के इस अहम मौक़े पर विधानसभा परिसर सियासी शख्सियतों, संवैधानिक गरिमा और लोकतांत्रिक चेतना का केंद्र बन गया। कार्यक्रम का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया।

इस मौके पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने “सशक्त विधायक–सशक्त लोकतंत्र” विषय पर विधानमंडल के सदस्यों को संबोधित करते हुए बिहार की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बिहार आध्यात्म की ऐतिहासिक धरती है, जहां से विचार, आंदोलन और नेतृत्व की परंपरा निकली है। ओम बिड़ला ने दो टूक कहा कि “विधानसभाओं से ही देश का नेतृत्व निकलता है, इसलिए सदन की मर्यादा और गरिमा बनाए रखना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है।”
लोकसभा अध्यक्ष ने सदन में शोर-शराबे की सियासत पर अप्रत्यक्ष चोट करते हुए कहा कि अपनी बात रखने का सबसे सशक्त रास्ता संविधान की समझ और जनता की भावना का सम्मान है, न कि हंगामा। इस मौके पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि देश में सदनों की मर्यादा गिर रही है।उन्होंने विधायकों से अपील की कि जनता उन्हें बड़ी उम्मीदों के साथ सदन में भेजती है, इसलिए जनता के सवालों और सरोकारों को पूरी संजीदगी से उठाया जाना चाहिए।
डिजिटल लोकतंत्र की दिशा में हो रहे बदलावों पर बात करते हुए ओम बिड़ला ने कहा कि अब देश की संसद और राज्यों की विधानसभाओं की कार्यवाही एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर देखी जा सकती है। उन्होंने ऐलान किया कि 2026 के अंत तक देश की सभी विधानसभाओं का डिजिटाइजेशन पूरा कर लिया जाएगा, जिससे विधायकों की जानकारी, क्षमता और पारदर्शिता में इज़ाफ़ा होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि आज के दौर में सदनों की मर्यादा पर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए विधायकों का सशक्त होना बेहद ज़रूरी है। डिजिटल डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बेहतर इस्तेमाल से विधायक जनता से अधिक प्रभावी संवाद कर सकते हैं और नीतियों को ज़मीन से जोड़ सकते हैं।
कुल मिलाकर, बिहार विधानसभा का स्थापना दिवस सिर्फ़ एक औपचारिक समारोह नहीं रहा, बल्कि यह लोकतंत्र को मजबूत करने, सदन की गरिमा बचाने और भविष्य की सियासत को दिशा देने का संकल्प दिवस बन गया, जहां से सियासी रहनुमाओं को आत्ममंथन का पैग़ाम मिला।