रेलवे का बड़ा फरमान - टीटीई और बुकिंग क्लर्क सावधान! अब 'Group C' लाखों कर्मचारियों को संपत्ति की पाई-पाई का देना होगा हिसाब

भारतीय रेलवे ने भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए टीटीई, बुकिंग क्लर्क और सुपरवाइजर जैसे लाखों ग्रुप-सी कर्मचारियों के लिए अपनी और परिवार की अचल संपत्ति का ब्योरा देना अनिवार्य कर दिया है। इस आदेश से महकमे में हलचल मची है।

रेलवे का बड़ा फरमान - टीटीई और बुकिंग क्लर्क सावधान! अब 'Gro

Patna - भारतीय रेलवे ने अपने सिस्टम से भ्रष्टाचार की धूल झाड़ने के लिए अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा 'सर्जिकल स्ट्राइक' किया है। रेलवे बोर्ड के एक नए फरमान ने महकमे के उन लाखों नॉन-गजटेड कर्मचारियों की 'टेंशन' बढ़ा दी है, जो सीधे जनता के संपर्क में रहते हैं और रुपयों के लेन-देन से जुड़े हैं। अब केवल बड़े अधिकारी ही नहीं, बल्कि 'ग्रेड-पे 4600' या उससे अधिक वेतन पाने वाले हजारों ग्रुप-सी कर्मचारियों को भी अपनी पाई-पाई का हिसाब सरकार को देना होगा।

किन पदों पर मचेगा 'हाहाकार'?


बोर्ड के निदेशक (स्थापना) प्रिया गोपाल कृष्णन द्वारा जारी पत्र के अनुसार, अब कमर्शियल स्टाफ, रिजर्वेशन और बुकिंग क्लर्क, ऑन-बोर्ड स्टाफ में टीटीई (TTE) और टिकट चेकर, विभिन्न विभागों के सुपरवाइजर और पार्सल क्लर्क जैसे पदों पर तैनात कर्मचारियों के लिए अपनी अचल संपत्ति का सालाना रिटर्न (IPR) भरना अनिवार्य कर दिया गया है। ये वो पद हैं जहां रुपयों का सीधा लेन-देन होता है और अक्सर भ्रष्टाचार की शिकायतें आती रहती हैं। अब तक ये कर्मचारी खुद को इस नियम के दायरे से बाहर मानते थे, लेकिन अब इनकी 'मनमानी' पर पूरी तरह रोक लग जाएगी।

सिर्फ खुद की नहीं, 'परिवार' की संपत्ति का भी देना होगा ब्योरा

इस नए नियम की सबसे 'खतरनाक' बात यह है कि कर्मचारियों को न केवल अपनी, बल्कि अपने परिवार के सदस्यों (पत्नी, बच्चों) के नाम पर खरीदी गई जमीन, मकान या फ्लैट की जानकारी भी देनी होगी। इसमें विरासत में मिली संपत्ति से लेकर लीज या मॉर्गेज पर ली गई प्रॉपर्टी तक का पूरा विवरण शामिल करना होगा। अब कोई भी कर्मचारी बेनामी संपत्ति या परिवार के नाम पर संपत्ति छिपाकर नहीं रख पाएगा। उत्तर मध्य रेलवे के सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि इस आदेश को जोन में कड़ाई से लागू किया जा रहा है।

क्यों पड़ी इस सख्त कदम की जरूरत?

अक्सर यह शिकायतें आती थीं कि रेलवे के फ्रंट-लाइन स्टाफ की संपत्ति उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक बढ़ रही है। कई कर्मचारी भ्रष्टाचार के जरिए अकूत संपत्ति जमा कर लेते थे और नियम के दायरे से बाहर होने का फायदा उठाकर बच जाते थे। रेलवे बोर्ड ने इस लूपहोल (खामी) को पहचान लिया है और अब पारदर्शिता लाने के लिए यह कड़ा कदम उठाया है। इस नई व्यवस्था से न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, बल्कि रेलवे की छवि भी आम जनता के बीच अधिक विश्वसनीय बनेगी।

अधिकारियों में मची अफरा-तफरी, सता रहा है गाज गिरने का डर

इस आदेश के बाद से रेलवे के सुपरवाइजर और अन्य प्रभावित कर्मचारियों के बीच भगदड़ जैसी स्थिति है। सूत्रों के मुताबिक, कई कर्मचारी अब अपनी 'काली कमाई' को छिपाने के लिए नए रास्ते तलाश रहे हैं। उन्हें डर सता रहा है कि संपत्ति का हिसाब देने पर उनकी पोल खुल सकती है और उन पर विभागीय कार्यवाही हो सकती है। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि संपत्ति का ब्योरा न देने वाले या गलत जानकारी देने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस 'पारदर्शिता' के खेल में कितने 'भ्रष्ट' खिलाड़ी नपते हैं।