जमीन मापी के लिए नहीं काटने होंगे दफ्तर के चक्कर! सात निश्चय-3 के तहत नई मापी नीति लागू, ऑनलाइन होगा सारा काम

बिहार में भूमि विवादों को खत्म करने और राजस्व प्रशासन को पारदर्शी बनाने की दिशा में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है. राज्य सरकार के 'सात निश्चय-3' के तहत अब जमीन की मापी के लिए लोगों को महीनों इंतजार नहीं करना होगा

जमीन मापी के लिए नहीं काटने होंगे दफ्तर के चक्कर! सात निश्चय

Patna : बिहार सरकार के सात निश्चय-3 के तहत "Ease of Living" के लक्ष्य को साकार करने के लिए उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भूमि मापी की नई और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया है। आगामी 26 जनवरी से 31 मार्च 2026 तक पूरे राज्य में 'मापी महाअभियान' चलाया जाएगा, जिसमें अविवादित भूमि की मापी मात्र 7 दिनों के भीतर पूरी की जाएगी। इस नई व्यवस्था से न केवल अनावश्यक भूमि विवादों पर लगाम लगेगी, बल्कि राजस्व प्रशासन में जनता का भरोसा भी मजबूत होगा।

समय-सीमा में भारी कटौती: 11 दिनों में सुलझेंगे विवादित मामले

उपमुख्यमंत्री के निर्देश पर विभाग ने मापी की समय-सीमा को पूरी तरह बदल दिया है, जिससे अब लोगों को महीनों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। नई व्यवस्था के तहत अविवादित भूमि की मापी आवेदन के मात्र 7 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी। वहीं, विवादित भूमि की मापी के लिए अधिकतम 11 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की गई है। इसके अतिरिक्त, मापी के बाद अमीन को 14वें दिन तक पोर्टल पर प्रतिवेदन अनिवार्य रूप से अपलोड करना होगा, जबकि पहले इस पूरी प्रक्रिया के लिए 30 दिनों की व्यवस्था थी।

पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन और पारदर्शी

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव श्री सी. के. अनिल द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, अब भूमि मापी के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन किए जाएंगे। आवेदन के समय ही आवेदक को यह स्पष्ट करना होगा कि भूमि विवादित है या अविवादित। विवादित मामलों में अंचलाधिकारी 3 दिनों के भीतर अमीन और तिथि का निर्धारण करेंगे, जो आगामी 7 दिनों के भीतर की होगी। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी चौहद्दीदारों को सिस्टम द्वारा स्वतः एसएमएस (SMS) के जरिए सूचना और नोटिस भेजा जाएगा।

निर्धारित शुल्क और मापी महाअभियान का लक्ष्य

नई व्यवस्था के तहत मापी शुल्क भी स्पष्ट रूप से निर्धारित कर दिया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह शुल्क 500 रुपये प्रति खेसरा और शहरी क्षेत्रों में 1000 रुपये प्रति खेसरा होगा, जबकि तत्काल मापी के मामलों में यह राशि दोगुनी देय होगी। लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए 26 जनवरी से 31 मार्च 2026 तक 'मापी महाअभियान' चलाया जाएगा। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य 31 दिसंबर 2025 तक लंबित सभी मापी आवेदनों का निष्पादन सुनिश्चित करना है। 

वैज्ञानिक और मानक प्रारूप में जमा होगा प्रतिवेदन

अब जमीन मापी की रिपोर्ट जैसे-तैसे जमा नहीं की जा सकेगी, बल्कि विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए मानक प्रारूप में ही प्रतिवेदन जमा करना होगा। इस प्रारूप में आवेदक और भूमि का पूर्ण विवरण, आवश्यक चेकलिस्ट, नजरी नक्शा और साक्षियों की विवरणी के साथ अमीन का मंतव्य एवं हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे। इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए आवश्यकतानुसार विशेष सर्वेक्षण अमीनों की प्रतिनियुक्ति की जाएगी और पूरे अभियान के नियंत्री पदाधिकारी संबंधित जिले के समाहर्ता (DM) होंगे।