बिहार में भाजपा सरकार बनने के बाद पहली बार पटना पहुंचे RSS प्रमुख मोहन भागवत, अगुवानी में एयरपोर्ट पहुंचे सीएम सम्राट, तीन दिन रहेंगे मुंगेर में

बिहार में भाजपा सरकार बनने के बाद पहली बार आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पटना पहुंचे तो उनकी अगुवानी में खुद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी हवाईअड्डे पर मौजूद रहे.

Mohan Bhagwat
Mohan Bhagwat - फोटो : news4nation

Mohan Bhagwat : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत रविवार को तीन दिवसीय बिहार प्रवास पर पटना पहुंचे। पटना एयरपोर्ट पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित संघ और भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने उनका स्वागत किया। एयरपोर्ट से बाहर निकलते समय सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और पुलिस-प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया।


पटना पहुंचने के बाद मोहन भागवत मुंगेर के लिए रवाना हुए, जहां वे 7 से 9 जून तक आयोजित संघ शिक्षा वर्ग में शामिल होंगे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष समारोह के तहत आयोजित इस कार्यक्रम को संगठनात्मक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संघ इस वर्ष अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने का उत्सव देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से मना रहा है।


मुंगेर के पुरानीगंज स्थित सरस्वती विद्या मंदिर परिसर में आयोजित संघ शिक्षा वर्ग के दौरान सरसंघचालक स्वयंसेवकों को संबोधित करेंगे और उन्हें संगठन की विचारधारा, कार्यपद्धति तथा सामाजिक दायित्वों के बारे में मार्गदर्शन देंगे। तीन दिवसीय प्रवास के दौरान वे विभिन्न प्रशिक्षण सत्रों में भी हिस्सा लेंगे।


संघ सूत्रों के अनुसार वर्तमान में मुंगेर में चल रहे तीन अलग-अलग प्रशिक्षण वर्गों में करीब 700 स्वयंसेवक भाग ले रहे हैं। इन स्वयंसेवकों को अनुशासन, संगठन कौशल, सामाजिक समरसता, राष्ट्र सेवा और नेतृत्व क्षमता से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की मौजूदगी को देखते हुए आयोजन स्थल पर विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।


संघ शिक्षा वर्ग को संघ की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, जहां स्वयंसेवकों को वैचारिक और संगठनात्मक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। ऐसे में सरसंघचालक मोहन भागवत की मौजूदगी और उनका मार्गदर्शन स्वयंसेवकों के लिए विशेष महत्व रखता है।


बिहार में संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों के बीच मोहन भागवत का यह दौरा संगठन के विस्तार और आगामी गतिविधियों की दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। उनके प्रवास के दौरान कई संगठनात्मक बैठकों और संवाद कार्यक्रमों के भी आयोजित होने की संभावना है।