Cancer Gene Test: कैंसर के डायग्नोसिस में मिली बड़ी कामयाबी, सैंगर सीक्वेंसिंग से ढाई घंटे में मिलेगी रिपोर्ट,बिहार के स्वास्थ्य इतिहास में मील का पत्थर हो रही है साबित मशीन

Cancer Gene Test:बिहार में जानलेवा मर्ज कैंसर के खिलाफ जंग में चिकित्सा जगत को एक संजीवनी और बड़ी कामयाबी मिली है।...

Sanger Sequencing Cancer Gene Report in Just Two and Half Ho
कैंसर के डायग्नोसिस में मिली बड़ी कामयाबी- फोटो : social Media

Cancer Gene Test:बिहार में जानलेवा मर्ज कैंसर के खिलाफ जंग में चिकित्सा जगत को एक संजीवनी और बड़ी कामयाबी मिली है। पटना के महावीर कैंसर संस्थान ने अत्याधुनिक सैंगर सीक्वेंसिंग मशीन की शुरुआत करके सूबे की मेडिकल जगत में एक नया इतिहास रच दिया है। करीब 65 लाख रुपये के भारी-भरकम बजट से स्थापित यह आधुनिक उपकरण कैंसर के मरीजों के लिए किसी मसीहा से कम नहीं है।अब तक कैंसर के आनुवंशिक और जीनोमिक बदलावों की शिनाख्त के लिए मरीजों को हफ्तों तक तड़पना और इंतजार करना पड़ता था, जिससे मर्ज आखिरी स्टेज तक पहुंच जाता था। लेकिन अब इस मशीन की बदौलत जीन की मुकम्मल जांच रिपोर्ट महज ढाई घंटे में उपलब्ध हो सकेगी।

डॉक्टर ने बताया कि कैंसर कोशिकाओं के डीएनए में होने वाली जीन में तब्दीली ही इस जानलेवा बीमारी की जड़ होती है। सैंगर सीक्वेंसिंग तकनीक से हम मरीज के क्रोमोसोम और जीन की सूक्ष्म संरचना (असाधारण जांच) कर सकेंगे। इससे यह सटीक पता चलेगा कि कैंसर का ट्यूमर किस रफ्तार से फैल रहा है।

इस आधुनिक जाँच का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि ऑन्कोलॉजिस्ट्स  को मरीज की डायग्नोसिस करने में रत्ती भर भी संशय नहीं रहेगा।डॉक्टरों को यह तय करने में मदद मिलेगी कि मरीज को किस किस्म की कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी देनी है। बीमारी की सही शिनाख्त होने से दवाओं का ओवरडोज या गलत इलाज का अंदेशा पूरी तरह खत्म हो जाएगा।महावीर कैंसर संस्थान प्रशासन का दावा है कि बिहार में पहली बार यह आला दर्जे की सहूलियत शुरू की गई है। इस मील के पत्थर से न सिर्फ गरीब मरीजों के वक्त और पैसे की बचत होगी, बल्कि उन्हें रियायती दरों पर सटीक इलाज मिल सकेगा। राज्य में कैंसर के इलाज को यह तकनीक एक नई और असरदार दिशा देने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।

बता दें सेंगर सीक्वेंसिंग  डीएनए के सटीक आनुवंशिक कोड को पढ़ने की एक तकनीक है। इसे 1977 में फ्रेडरिक सेंगर ने विकसित किया था। इसे चेन टर्मिनेशन मेथड भी कहते हैं।यह तरीका कैंसर की जांच में  99.99 फीसदी तक सटीक होता है। वैज्ञानिक आज भी इसका उपयोग छोटे डीएनए खंडों की जांच के लिए करते हैं। 

रिपोर्ट- प्रांजलि सिन्हा