साजिश या संयोग, भाजपा के मंच पर कृषि मंत्री विजय सिन्हा को किया गया इग्नोर! जेपी नड्डा-सम्राट चौधरी की मौजूदगी में हुआ बड़ा कांड

कार्यक्रम के दौरान जब मंच पर मौजूद अन्य नेताओं को सम्मानित किया गया और विजय सिन्हा का नाम नहीं लिया गया, तो सभागार में मौजूद कई लोग हैरान रह गए।

Vijay Sinha was ignored on the BJP stage
Vijay Sinha was ignored on the BJP stage- फोटो : news4nation

Vijay Kumar Sinha :  भाजपा द्वारा आपातकाल की बरसी पर आयोजित ‘संविधान हत्या दिवस’ कार्यक्रम के दौरान पटना के ज्ञान भवन में एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। मंच पर उपस्थित नेताओं को क्रमवार सम्मानित किया जा रहा था, लेकिन इसी दौरान बिहार सरकार के कृषि मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय सिन्हा का नाम पुकारना आयोजक भूल गए।


कार्यक्रम के दौरान जब मंच पर मौजूद अन्य नेताओं को सम्मानित किया गया और विजय सिन्हा का नाम नहीं लिया गया, तो सभागार में मौजूद कई लोग हैरान रह गए। बाद में कार्यक्रम के समापन के समय मंच संचालक और पूर्व विधायक पवन जायसवाल ने घोषणा करते हुए कहा कि त्रुटिवश विजय सिन्हा का नाम छूट गया था। इसके बाद उन्हें भी सम्मानित कर औपचारिकता पूरी की गई। हालांकि भाजपा की ओर से इसे महज मानवीय भूल बताया गया, लेकिन इस घटना ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है। इसकी वजह विजय सिन्हा की पार्टी के भीतर मानी जाने वाली राजनीतिक हैसियत और पिछले कुछ वर्षों के घटनाक्रम हैं।


दरअसल, मुख्यमंत्री चयन के समय विजय सिन्हा को भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद का एक मजबूत दावेदार माना जा रहा था। उस समय भाजपा विधायक दल की बैठक में विजय सिन्हा ने ही सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव रखा था। लेकिन बाद में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा था कि उन्होंने अपने "कमांडर" के आदेश का पालन किया है। उनके इस बयान को लेकर काफी राजनीतिक चर्चा हुई थी और इसे उनकी नाराजगी से जोड़कर देखा गया था।


हालांकि विजय सिन्हा ने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा है कि उनके और सम्राट चौधरी के बीच किसी प्रकार का मतभेद नहीं है और पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाएं केवल अफवाह हैं। इसके बावजूद राजनीतिक विश्लेषक समय-समय पर दोनों नेताओं की भूमिका और पार्टी में उनके प्रभाव की तुलना करते रहे हैं।


यही कारण है कि ज्ञान भवन के मंच पर विजय सिन्हा का नाम सम्मान सूची से छूट जाने की घटना को लेकर सवाल उठने लगे हैं। खास बात यह रही कि मंच पर जेपी नड्डा के एक ओर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और दूसरी ओर विजय सिन्हा बैठे थे। ऐसे में समर्थकों और राजनीतिक पर्यवेक्षकों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई है कि यह महज संयोग था या फिर इसके पीछे कोई राजनीतिक संदेश छिपा हुआ है।


फिलहाल भाजपा नेताओं ने इसे एक साधारण प्रशासनिक चूक बताया है, लेकिन घटना ने बिहार भाजपा की अंदरूनी राजनीति को लेकर अटकलों का बाजार जरूर गर्म कर दिया है।

नरोत्तम की रिपोर्ट