आरक्षण पर NDA में भिड़ंत, बड़े बदलाव पर अड़े संतोष सुमन, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की हम ने विरोधियों को दी बड़ी चुनौती

आरक्षण में समीक्षा को लेकर एनडीए में घमासान वाली स्थिति है. एक ओर जदयू के श्याम रजक ने कहा कि अगर आरक्षण में कोई बदलाव हुआ तो गृह युद्ध जैसी स्थिति हो जाएगी तो हम के संतोष सुमन ने आरक्षण का उचित लाभ वंचित वर्ग तक पहुँचाने के लिए समीक्षा की मांग की

Santosh Suman
Santosh Suman- फोटो : news4nation

Bihar News : आरक्षण की समीक्षा को लेकर बिहार के सियासी दलों के बीच जुबानी जंग जारी है। इसी को लेकर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हम की ओर से आरक्षण में बदलाव के समर्थन में बड़ा ऐलान किया गया। पार्टी प्रमुख और बिहार सरकार में मंत्री संतोष सुमन ने कहा कि सबसे वंचितों के हक की बात करना आरक्षण का विरोध कैसे हो गया ?  उन्होंने कहा, जो लोग SC-ST आरक्षण में वर्गीकरण और कोटे में कोटा की मांग का विरोध कर रहे हैं, उनसे हमारा सीधा सवाल है—आज भी समाज में जिस छुआछूत और सामाजिक भेदभाव की सबसे अधिक मार झेलने वाले समुदाय हैं, उनकी स्थिति की समीक्षा आखिर क्यों नहीं होनी चाहिए?


उन्होंने कहा कि मुसहर, भुइयाँ, डोम, हलखोर, नट जैसी अनेक जातियाँ आज भी सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से बेहद पिछड़ी स्थिति में हैं। चिंता की बात यह है कि इनमें से कई समुदायों को अपने ही आरक्षित वर्ग की अन्य जातियों के बीच भी सामाजिक भेदभाव और छुआछूत जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। यह एक ऐसी सामाजिक हकीकत है जिसे कोई भी संवेदनशील नेता कैसे अनसुना कर सकता है?


उन्होंने कहा कि अगर समाज के भीतर ही कुछ समुदाय लगातार सबसे नीचे खड़े रहने को मजबूर हैं, तो आखिर उनके उत्थान और सम्मान का रास्ता कौन बनाएगा? आखिर कैसे होगा इनका भी उद्धार? क्या केवल यह कह देना पर्याप्त है कि आरक्षण के भीतर किसी तरह का वर्गीकरण नहीं होना चाहिए? हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि हम क्रीमी लेयर की बात नहीं कर रहे हैं। क्रीमी लेयर एक अलग विषय है। हमारी बात SC-ST आरक्षण के भीतर वर्गीकरण और कोटे में कोटा की है। इन दोनों विषयों को मिलाकर जनता को भ्रमित करना उचित नहीं है।


जदयू ने किया विरोध

जेडीयू के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने आरक्षण व्यवस्था को लेकर बेहद तल्ख टिप्पणी की है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर आरक्षण में किसी तरह की समीक्षा या बदलाव की कोशिश हुई तो हालात बेहद गंभीर हो सकते हैं और गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।श्याम रजक ने आरक्षण की समीक्षा के सवाल पर कहा कि आरक्षण में किसी भी तरह की समीक्षा या छेड़छाड़ की बात सामने आती है तो इसका व्यापक विरोध होगा।


आरक्षण समाप्त नहीं उचित लाभ मिले 

संतोष सुमन ने कहा कि आरक्षण समाप्त करने की हमारी कोई मांग नहीं है। बल्कि हमारा सवाल यह है कि आरक्षण का लाभ उन समुदायों तक भी कैसे पहुँचे, जो आज तक अपेक्षित रूप से लाभान्वित नहीं हो पाए हैं। सामाजिक न्याय का अर्थ केवल आरक्षण की व्यवस्था को बनाए रखना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि उसका लाभ समाज के सबसे वंचित व्यक्ति तक पहुँचे। जो लोग समाज के नेता होने का दावा करते हैं, उनकी जिम्मेदारी केवल मजबूत और प्रभावशाली वर्गों की आवाज उठाना नहीं, बल्कि उन लोगों की आवाज बनना भी है जो आज भी सामाजिक भेदभाव, गरीबी और अवसरों की कमी से जूझ रहे हैं।


 उचित हिस्सा मिले 

उन्होंने कहा कि किसी भी संवेदनशील नेतृत्व के सामने यह सवाल होना चाहिए—जो सबसे पीछे छूट गया है, उसे आगे कैसे लाया जाए? उसे सम्मान कैसे मिले? उसे उसका उचित हिस्सा कैसे मिले? यही वर्गीकरण और कोटे में कोटा की बहस का मूल सवाल है। इसे आरक्षण विरोध बताकर खारिज करने के बजाय, हमें सबसे वंचित समुदायों की वास्तविक स्थिति पर ईमानदारी और संवेदनशीलता से विचार करना चाहिए।