Monsoon 2026: बिहार में समुद्री हलचल से बदलेगा बारिश का गणित, 2026 में सूबा झेलेगा बाढ़ और सूखे का डबल अटैक, कैसा रहेगा मानसून,पढ़िए

Monsoon 2026: बिहार में 2026 का मानसून आम सालों से जुदा रहने के आसार जता रहा है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्र में बढ़ती हलचल खासकर प्रशांत और हिंद महासागर में तापमान के उतार-चढ़ावका सीधा असर बारिश के पैटर्न पर पड़ सकता है।...

Sea Turbulence to Hit Bihar with Flood Drought in Monsoon 20
2026 में बिहार झेलेगा बाढ़ और सूखे का डबल अटैक!- फोटो : X

Monsoon 2026: इस साल मानसून का मिज़ाज कुछ बदला-बदला नजर आएगा। कारण है कि  समंदर की सतह पर हो रही हलचल और वैश्विक मौसमी पैटर्न में तब्दीली ने बारिश के गणित को उलझा दिया है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक 2026 में बिहार को दोहरी मार झेलनी पड़ सकती है, उत्तर बिहार में जरूरत से ज्यादा बारिश से बाढ़ का खतरा, तो दक्षिण बिहार में कम बरसात से सूखे जैसे हालात पैदा होने की आशंका जताई जा रही है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के शुरुआती संकेत बताते हैं कि इस बार देश में बारिश बराबरी से बंटवारा नहीं होगी। जब मानसून की आमद तटस्थ समुद्री हालात में होती है, तो कहीं बादल मेहरबान हो जाते हैं और कहीं आसमान बेरहम। मौजूदा ला नीना फरवरी से अप्रैल के दरम्यान कमजोर होकर न्यूट्रल स्थिति में जा सकती है। ऐसे में मानसूनी हवाओं को ठोस सहारा नहीं मिल पाता।

बता दें ला नीना दरअसल प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में असामान्य ठंडक की कुदरती प्रक्रिया है, जो आम तौर पर भारत में बेहतर बारिश और सर्दियों में कड़ाके की ठंड लाती है। लेकिन इस बार प्रशांत महासागर में न ज्यादा ठंडक है, न ज्यादा गर्मी यानी हालात तटस्थ हैं। उधर हिंद महासागर भी न्यूट्रल मोड में है। अगर यह सकारात्मक चरण में नहीं गया, तो मानसून को अतिरिक्त ऊर्जा नहीं मिलेगी। नतीजा बारिश का बंटवारा असमान।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि मानसून की एंट्री समय पर हो सकती है, लेकिन इसकी सक्रियता असमान रह सकती है। कभी झमाझम बारिश, तो कभी लंबा ब्रेक ऐसी स्थिति खेती-किसानी के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। धान, मक्का और दलहन की बुवाई सीधे तौर पर प्रभावित हो सकती है।मौसम विभाग का कहना है कि 2026 का मानसून बदलाव के दौर से गुजरेगा। किसानों को लंबी अवधि के पूर्वानुमान देखकर फसल की प्लानिंग करने की सलाह दी गई है। अब प्रखंड स्तर तक मौसम पूर्वानुमान की नई व्यवस्था लागू की जाएगी, ताकि गांव-देहात तक सटीक जानकारी पहुंच सके।

बीते कुछ वर्षों का रिकॉर्ड भी इशारा करता है कि बारिश के दिन घट रहे हैं, लेकिन कम दिनों में तेज और मूसलाधार बारिश की वारदातें बढ़ी हैं। 2019 से 2021 के बीच अधिक वर्षा और बाढ़ की स्थिति रही, जबकि 2022 से 2025 तक कई जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई।

उत्तर बिहार और नेपाल की तराई वाले इलाकों में जबरदस्त बारिश होती है, जिससे नदियां उफान पर आ जाती हैं। वहीं गया, नवादा और औरंगाबाद जैसे दक्षिणी जिलों में बादल अक्सर कम मेहरबान रहते हैं। अब पूरी बरसात कुछ ही दिनों में सिमट रही है। नतीजा एक ही सीजन में कहीं सैलाब, तो कहीं प्यासे खेत।

मौसम की यह अनिश्चित तस्वीर सरकार और किसानों दोनों के लिए इम्तिहान साबित हो सकती है। अगर समुद्री संकेत ऐसे ही रहे, तो 2026 का मानसून बिहार के लिए राहत से ज्यादा चुनौती लेकर आ सकता है। हालांकि अंतिम तस्वीर मानसून की प्रगति पर ही साफ होगी, लेकिन संकेत यही हैं कि 2026 में बिहार को मौसम के दोहरे वार के लिए तैयार रहना होगा। बदलते मौसम के इस मिजाज ने प्रशासन और किसानों दोनों की चिंता बढ़ा दी है।