पटना में खाकी पर गंभीर आरोप: कोर्ट ने नहीं लगाई रोक, फिर पुलिस ने किसके आदेश पर बंद कराया काम?

पटना के राजीव नगर इलाके में एक महिला के निजी भूखंड पर पुलिसिया दखलंदाजी और निर्माण कार्य रोकने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है।

Serious allegations against the police in Rajiv Nagar
पटना में खाकी पर गंभीर आरोप: कोर्ट ने नहीं लगाई रोक, फिर पुलिस ने किसके आदेश पर बंद कराया काम?- फोटो : news 4 nation AI

बिहार की राजधानी पटना के राजीव नगर थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली और सुशासन के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फ्रेंड्स कॉलोनी की निवासी और भूखंड स्वामिनी अलका देवी ने आरोप लगाया है कि स्थानीय पुलिस बिना किसी अदालती आदेश या सक्षम प्राधिकार के निर्देश के उनके निजी भूखंड पर गृह निर्माण के कार्य को जबरन बाधित कर रही है। उन्होंने इस मामले में दोनों डिप्टी सीएम (सम्राट चौधरी व विजय सिन्हा) और डीजीपी समेत उच्चाधिकारियों को आवेदन देकर जांच की मांग की है।

पूरी तरह विधि-सम्मत है जमीन की खरीद-बिक्री

अलका देवी के अनुसार, उन्होंने वर्ष 2023 में नवीन कुमार से फ्रेंड्स कॉलोनी रोड नंबर 3 में एक भूखंड खरीदा था। इस जमीन की रजिस्ट्री, दाखिल-खारिज और रसीद पूरी तरह कानूनी है। निबंधन से पूर्व पुलिस और निबंधन कार्यालय ने भी दस्तावेजों का सत्यापन किया था। जमीन लंबे समय से शांतिपूर्वक कब्जे में थी, लेकिन पिछले कुछ समय से पूर्व भू-स्वामी के चचेरे भाई द्वारा इस पर अनर्गल विवाद पैदा करने की कोशिश की जा रही थी।

कोर्ट ने खारिज किया वाद, फिर भी पुलिस बनी अड़चन

मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब पता चला कि पटना जिला न्यायालय के सिविल जज (द्वितीय) प्रफुल्ल कुमार सिंह ने 10 फरवरी 2026 को विपक्ष द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें जमीन पर रोक (निषेधाज्ञा) की मांग की गई थी। कोर्ट के आदेश के बाद कानूनी रूप से निर्माण पर कोई रोक नहीं है, लेकिन अलका देवी का आरोप है कि पुलिस 'ऊपरी आदेश' का हवाला देकर कामगारों को भगा रही है और निर्माण नहीं होने दे रही।

बिना लिखित आदेश के 'मौखिक निर्देश' पर रुकी कार्रवाई

पीड़िता का आरोप है कि 30 जनवरी को पुलिसकर्मियों ने बिना किसी लिखित आदेश के उनके घर पर आकर निर्माण कार्य रुकवा दिया। जब उन्होंने थाने से संपर्क किया, तो उन्हें कोई ठोस जवाब नहीं मिला। अलका देवी ने आशंका जताई है कि स्थानीय पुलिस को या तो गुमराह किया गया है या फिर किसी प्रलोभन के तहत वे माफिया तत्वों की मदद कर रहे हैं। बिना किसी सक्षम प्राधिकार के हस्तक्षेप के पुलिस का यह कदम पूरी तरह से गैर-कानूनी प्रतीत होता है।

न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की चेतावनी

अलका देवी ने अपने आवेदन में स्पष्ट किया है कि वे इस मानसिक प्रताड़ना और प्रशासनिक अत्याचार के खिलाफ पीछे नहीं हटेंगी। उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो ताकि भविष्य में किसी अन्य नागरिक के साथ ऐसा न हो। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनके निजी भूखंड पर विधि-सम्मत निर्माण कार्य शुरू नहीं करने दिया गया, तो वे न्याय के लिए पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी।