Bihar Transport News:स्लीपर बसों पर सरकार का सख़्त एक्शन, नियमों से किया खिलवाड़ तो सीधा परमिट होगा रद्द, जान लीजिए कानून
Bihar Transport News: बिहार में स्लीपर बसों के संचालन को लेकर सरकार ने अब सख़्त रुख़ अख्तियार कर लिया है।...
Bihar Transport News: बिहार में स्लीपर बसों के संचालन को लेकर सरकार ने अब सख़्त रुख़ अख्तियार कर लिया है। लगातार मिल रही शिकायतों और हाल के दिनों में स्लीपर बसों में आग लगने की घटनाओं के बाद परिवहन विभाग हरकत में आ गया है। परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने दो टूक कहा है कि जो बसें सीटर परमिट पर पंजीकृत होकर अवैध रूप से स्लीपर या मिक्स्ड सीटर-स्लीपर में तब्दील की गई हैं, उनका परमिट बिना किसी नरमी के तुरंत रद्द किया जाएगा।
मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि यात्रियों की जान के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच में यह सामने आया है कि कई बस ऑपरेटर नियमों को ताक पर रखकर सीटर बसों को अंदर से स्लीपर बना रहे हैं। यह न सिर्फ़ केंद्रीय मोटर वाहन नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि आम मुसाफ़िरों की ज़िंदगी को सीधे खतरे में डालने जैसा है। ऐसी बसों में फायर सेफ्टी के इंतज़ाम न के बराबर हैं, इमरजेंसी एग्जिट अव्यवस्थित हैं और ओवरलोडिंग आम बात बन चुकी है।
खास तौर पर कटिहार–सिलीगुड़ी रूट पर चलने वाली ओवरनाइट स्लीपर बसों में सबसे ज़्यादा गड़बड़ियां सामने आई हैं। मंत्री ने माना कि यह सब बिना प्रशासनिक मिलीभगत के मुमकिन नहीं है। इसी वजह से सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि कार्रवाई सिर्फ़ बस मालिकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि नियमों की अनदेखी करने वाले आरटीओ अधिकारियों और अन्य ज़िम्मेदार कर्मियों पर भी सख़्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने फैसला लिया है कि अब स्लीपर बसें केवल मान्यता प्राप्त ऑटोमोबाइल कंपनियों या केंद्र सरकार से स्वीकृत फैक्ट्रियों में ही तैयार की जाएंगी। लोकल और अनधिकृत बॉडी बिल्डरों द्वारा स्लीपर कोच बनाने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। इससे बसों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर सख़्ती से अमल सुनिश्चित किया जाएगा।
इसके साथ ही हर स्लीपर बस में फायर डिटेक्शन सिस्टम अनिवार्य किया गया है। ड्राइवर की थकान या नींद की स्थिति को पहचानने के लिए एआई आधारित ड्राउज़िनेस अलर्ट सिस्टम भी लगाना होगा, जिससे झपकी आते ही अलार्म बज उठे। मौजूदा स्लीपर बसों में भी फायर डिटेक्टर, इमरजेंसी एग्जिट हैमर, इमरजेंसी लाइटिंग और ड्राइवर अलर्ट सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
परिवहन मंत्री ने दोहराया कि स्लीपर बसों का निर्माण, निरीक्षण और संचालन केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली 1989 के नियम मानकों के तहत ही होगा। तय आकार की बर्थ, इमरजेंसी निकास और सुरक्षा उपकरणों की सख़्त जांच की जाएगी। कुल मिलाकर, सरकार ने साफ संदेश दे दिया है कि अब स्लीपर बसों के नाम पर नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों की खैर नहीं।