श्रद्धांजलि पर सियासी संग्राम, लालू-मांझी परिवार आमने-सामने, रोहिणी-दीपा के इस वार से गरमाई बिहार की राजनीति

Bihar Politics: बिहार की सियासत में एक बयान ने ऐसा बवाल खड़ा कर दिया है कि अब इसकी तपिश लालू परिवार से निकलकर मांझी परिवार तक पहुंच गई है।

Tejashwi Remark Sparks War Between Lalu and Manjhi Families
श्रद्धांजलि पर सियासी संग्राम- फोटो : social Media

Bihar Politics: बिहार की सियासत में एक बयान ने ऐसा बवाल खड़ा कर दिया है कि अब इसकी तपिश लालू परिवार से निकलकर मांझी परिवार तक पहुंच गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के ‘जीतन राम मांझी को श्रद्धांजलि’ वाले बयान को लेकर शुरू हुई जुबानी जंग अब रोहिणी आचार्य और दीपा मांझी के बीच सीधे सियासी टकराव में बदल गई है। सोशल मीडिया पर दोनों तरफ से तीखे तंज, पुराने जख्म और राजनीतिक हिसाब-किताब सामने आने लगे हैं।

मामला 17 अगस्त को पटना स्थित RJD कार्यालय के कर्पूरी सभागार से शुरू हुआ। यहां पर्वत पुरुष दशरथ मांझी की 19वीं पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में तेजस्वी यादव भी पहुंचे थे। संबोधन के शुरुआती दौर में तेजस्वी ने दो बार दशरथ मांझी की जगह जीतन राम मांझी का नाम ले दिया। उन्होंने कहा कि जीतन राम मांझी के श्रद्धांजलि समारोह में मौजूद लोगों का आभार व्यक्त करते हैं। मंच पर मौजूद लोगों ने जब उन्हें टोका तो उन्होंने अपनी गलती सुधारी और दशरथ मांझी का नाम लिया।बस, यही चूक सियासी बारूद बन गई। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने वीडियो साझा करते हुए तेजस्वी पर तंज कसा और लिखा कि अगर हालात नहीं सुधरे तो आने वाले वक्त में वह अपने पिता लालू यादव और मां राबड़ी देवी को भी जीते-जी श्रद्धांजलि दे देंगे। मांझी ने ‘नशा’ का भी जिक्र करते हुए तेजस्वी की मानसिक स्थिति पर सवाल खड़े किए।मांझी ने यह भी कहा कि वह इतनी जल्दी मरने वाले नहीं हैं और बिहार के लिए जनहित के काम करते रहेंगे। उनके बयान ने सियासी पारा और चढ़ा दिया। इसके बाद लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य मैदान में उतर आईं और उन्होंने मांझी के तंज का जवाब देते हुए बीजेपी की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह से जुड़े हालिया बयान का हवाला दिया।

रोहिणी ने सवाल उठाया कि अगर बीजेपी की मंत्री से सार्वजनिक कार्यक्रम में जुबान फिसल सकती है तो नेता प्रतिपक्ष से गलती क्यों नहीं हो सकती? उन्होंने मांझी पर पलटवार करते हुए कहा कि श्रेयसी सिंह के मामले पर बोलने की औकात नहीं है।इसके बाद विवाद ने नया मोड़ लिया, जब मांझी परिवार की बहू दीपा मांझी ने रोहिणी आचार्य को सीधे निशाने पर ले लिया। दीपा ने रोहिणी के पुराने आरोपों और लालू परिवार के भीतर चले विवादों को सोशल मीडिया पर उठा दिया। उन्होंने रोहिणी से पूछा कि अगर पहले लगाए गए सवाल और आरोप सही थे तो आज किसी राजनीतिक जरूरत के लिए उन्हीं रिश्तों और सवालों को क्यों दबाया जा रहा है?

दीपा ने तेज प्रताप यादव को RJD से छह साल के लिए बाहर किए जाने और परिवार के भीतर लगातार सामने आए मतभेदों का भी जिक्र किया। उन्होंने इसे सिर्फ पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि RJD की राजनीतिक संस्कृति से जोड़ने की कोशिश की। इस पूरे प्रकरण में असल सियासी संदेश साफ है। एक तरफ तेजस्वी यादव की जुबान फिसलने को विपक्षी खेमे में राजनीतिक हथियार बनाया जा रहा है, तो दूसरी तरफ RJD इसे बीजेपी नेताओं की कथित जुबानी चूक से जोड़कर बचाव कर रही है। सोशल मीडिया पर चल रही यह जंग अब महज एक बयान की गलती नहीं रही, बल्कि बिहार की राजनीति में पुराने रिश्तों, नए समीकरणों और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की टकराहट का नया अखाड़ा बन गई है।