तेजस्वी यादव ने संभाली राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की कुर्सी, ताजपोशी पर पहनाया चांदी का मुकुट

तेजस्वी यादव का सियासी सफर अपेक्षाकृत कम समय में तेज़ी से आगे बढ़ा है। राजनीति में आने से पहले वे खेल जगत से जुड़े रहे, लेकिन 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा।

Tejashwi Yadav
Tejashwi Yadav- फोटो : news4nation

Tejashwi Yadav : राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने एक अहम संगठनात्मक फैसला लेते हुए तेजस्वी यादव को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। राजद कार्यालय में शनिवार को आयोजित एक कार्यक्रम में तेजस्वी को अधिकारिक रूप से कमान सौंपी गई । इस दौरान समर्थकों ने तेजस्वी को चांदी का मुकुट भी पहनाया । इस फैसले के साथ ही राजद की कमान औपचारिक रूप से अब लालू प्रसाद यादव की दूसरी पीढ़ी के हाथों में आ गई है। इसे पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन और भविष्य की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।


तेजस्वी यादव का सियासी सफर अपेक्षाकृत कम समय में तेज़ी से आगे बढ़ा है। राजनीति में आने से पहले वे खेल जगत से जुड़े रहे, लेकिन 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। महागठबंधन सरकार में उपमुख्यमंत्री के रूप में तेजस्वी यादव ने अपनी अलग पहचान बनाई और बाद के वर्षों में वे राजद के सबसे प्रमुख चेहरे के तौर पर उभरे। 2020 के विधानसभा चुनाव में राजद को सबसे बड़ी पार्टी बनाने में उनकी अहम भूमिका रही।


राजद का सफर 

राजद की स्थापना वर्ष 1997 में लालू प्रसाद यादव ने की थी। चारा घोटाले के बाद जनता दल से अलग होकर लालू यादव ने सामाजिक न्याय, पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों की राजनीति को केंद्र में रखकर राजद का गठन किया। मंडल राजनीति के दौर में राजद बिहार की राजनीति में एक मजबूत ताकत बनकर उभरी और लंबे समय तक सत्ता व विपक्ष दोनों में प्रभावी भूमिका निभाती रही।


राजद में पीढ़ीगत बदलाव

अब पार्टी की बागडोर तेजस्वी यादव को सौंपे जाने को पीढ़ीगत बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। जहां एक ओर लालू प्रसाद यादव राजद के वैचारिक मार्गदर्शक की भूमिका में बने रहेंगे, वहीं संगठन और चुनावी राजनीति की जिम्मेदारी अब तेजस्वी यादव के कंधों पर होगी।


राजद को मिलेगी नई ऊर्जा 

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तेजस्वी को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने से पार्टी को नई ऊर्जा मिलेगी और आने वाले विधानसभा व लोकसभा चुनावों में राजद एक बार फिर आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में उतरेगी। यह फैसला न सिर्फ राजद के भविष्य की दिशा तय करेगा, बल्कि बिहार की राजनीति में भी इसके दूरगामी असर देखने को मिल सकते हैं।

रंजन की रिपोर्ट