Bihar Budget Session: 15 दिन बाद पहुंचे और रुके केवल 20 मिनट, कोई सवाल भी नहीं पूछा, तेजस्वी यादव का बिहार विधानसभा आना सिर्फ 'औपचारिकता'

Bihar Budget Session: नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव 15 दिनों के बाद सदन पहुंचे लेकिन रुके केवल 20 मिनट, 20 मिनट में ही तेजस्वी सदन की कार्यवाही को छोड़कर चलते बने, जिसको लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या तेजस्वी केवल औपचारिकता पूरा करने के लिए स

तेजस्वी यादव
'औपचारिकता' निभा रहे नेता प्रतिपक्ष ?- फोटो : News4nation

Bihar Budget Session: बिहार विधानसभा के बजट सत्र जारी है। करीब 15 दिन बाद आज तेजस्वी यादव सदन पहुंचे। तेजस्वी यादव बजट सत्र के पहले कुछ दिन सदन पहुंचे थे लेकिन उसके बाद वो सदन नहीं आ रहे थे। वहीं नेता प्रतिपक्ष और राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव करीब 15 दिनों के अंतराल के बाद सदन की कार्यवाही में शामिल होने पहुंचे। हालांकि, उनकी मौजूदगी महज 20 मिनट तक ही सीमित रही, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

 20 मिनट में चलते बने नेता प्रतिपक्ष 

सत्र के दौरान तेजस्वी यादव का सामना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से होना था। माना जा रहा था कि वे सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरेंगे, लेकिन सदन में उन्होंने कोई सवाल नहीं उठाया और न ही किसी बहस में सक्रिय भागीदारी की। थोड़ी देर रुकने के बाद वे सदन से बाहर निकल गए। तेजस्वी यादव की संक्षिप्त उपस्थिति को लेकर सत्ता पक्ष के नेताओं ने इसे ‘औपचारिकता’ करार दिया है। तेजस्वी यादव के सदन की कार्यवाही में शामिल ना होने और आकर केवल 20 मिनट रुकने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। 

बिहार में बेटियां असुरक्षित 

बता दें कि, सदन पहुंचने से पहले तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर जबरदस्त हमला बोला था। सदन की कार्यवाही के दौरान भी राजद की ओर से बिहार में बेटियों को असुरक्षित बताकर सरकार का विरोध किया।  वहीं तेजस्वी ने सोशल मीडिया पर ट्विट कर लिखा कि, बिहार की बेटियों का काल बनी नीतीश-भाजपा सरकार। पटना जिले के मसौढ़ी थाना क्षेत्र की कोमल कुमारी दसवीं की छात्रा थी। माँ बाप की उम्मीद और सुनहरे भविष्य की आशा। 10वीं कक्षा की पहली परीक्षा थी। जाम और अव्यवस्था के चलते परीक्षा केंद्र पहुँचने में कुछ मिनटों की देरी हो गई और उसे परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिला। 

भविष्या के साथ हो रहा खिलवाड़ 

उसके लिए बिहार सरकार सारे दरवाज़े बंद कर चुकी थी। यह केवल स्कूल का दरवाजा ही नहीं था बल्कि दरवाजा उसके भविष्य का, उसकी सफलता का, उसकी नियति का और सबसे बढ़कर दरवाजा उसके जीवन का। कोमल कुमारी ने गुहार लगाई, मिन्नतें की कि उसे परीक्षा में बैठने दिया जाये पर किसी का दिल नहीं पसीजा। अंत में इस सरकारी व्यवस्था से निराश, हताश और परेशान होकर बिहार की इस कोमल बेटी ने कठोर बन ट्रेन के आगे कूद कर अपनी जान दे दी।

तेजस्वी का बड़ा हमला 

बिहारी होने के नाते हम दुखी है, ग़मज़दा है और हताश हैं। क्रूर निकम्मी सरकार के शासन में आख़िर बेटियों की जान लीलती इन अव्यवस्थाओं का कोई अंत भी तो नहीं दिखाई देता। हर जगह से तस्वीरें और वीडियो आ रहे हैं, बेटियां परीक्षा केंद्र के बंद गेट के आगे रो रही है पर दुख सुनने वाला कोई नहीं।  इस बहरी व्यवस्था के आगे अगर किसी और बेटी ने जान दे दी तो कितना ख़ौफ़नाक होता चला जाएगा ये सब। हम सभी को बोलना होगा, आवाज़ उठानी होगी।

नीतीश सरकार से मांग 

हम किसी भी कीमत पर बिहार की किसी और बेटी की जान एक दो मिनट की देरी के कारण नहीं जाने देंगे। हमारी बेटियां हमारा गर्व हैं और बिहारवासी अपने गर्व को बनाये रखने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। साथ ही सरकार को भी कहेंगे कि अविलंब कोमल कुमारी के परिजनों को मुआवजा दिया जाए और बेटियों को जाम आदि के कारण चंद  मिनटों से परीक्षा केंद्र पर देरी से पहुँचने पर प्रवेश दिया जाए। एक बेटी की जान एक दो मिनट से कहीं ज़्यादा कीमती और अमूल्य है।