Bihar Politics: सम्राट की सियासत पर उपेंद्र कुशवाहा की भविष्यवाणी, विरासत, कुर्सी और अदृश्य कशमकश के बीच रालोमो सुप्रीमो ने ये क्या कह दिया

Bihar Politics: बिहार की सियासत के गलियारों में इस वक्त कयासों और भविष्यवाणियों का बाजार गर्म है।...

Bihar Politics: सम्राट की सियासत पर उपेंद्र कुशवाहा की भविष्
सम्राट की सियासत पर उपेंद्र कुशवाहा की भविष्यवाणी- फोटो : social Media

Bihar Politics: बिहार की सियासत के गलियारों में इस वक्त कयासों और भविष्यवाणियों का बाजार गर्म है। पटना के बापू सभागार में आयोजित विकसित बिहार महामंथन सह लव-कुश प्रतिभा सम्मान समारोह के दौरान रालोमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कुछ ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक पंडितों के कान खड़े कर दिए हैं। मंच पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में कुशवाहा ने तंज और भाषण के बीच सियासत की नई कहानी अब शुरु हो गई है।

कुशवाहा ने नीतीश कुमार के दो दशक लंबे हुकूमत के सफर को याद करते हुए कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री की यह गद्दी विरासत में  नहीं मिली थी, बल्कि यह लंबे संघर्ष और लोगों की आशीर्वाद का नतीजा थी। उन्होंने कटाक्ष भरे लहजे में यह भी साफ कर दिया कि आज जिस कुर्सी पर सम्राट चौधरी विराजमान हैं, उसका भविष्य उनकी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और जनता की कृपा पर निर्भर है। जब तक यह करम बाकी है, तब तक कोई ताकत उन्हें इस मुकाम से डिगा नहीं सकती। राजनीति के इस फलसफे में विचारधारा और कुर्सी के फर्क को बहुत करीने से समझाया गया।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी अपनी तरोताजा सियासत का प्रदर्शन करते हुए पांच उंगलियों और पांच पांडवों की मिसाल दी। उन्होंने ऐतराज और इत्तेफाक से परे हटकर एनडीए के तमाम घटक दलों के एकजुट होने का दावा किया और साल 2025 के इम्तिहान में मिली फतह का परचम लहराया। चौधरी ने हुंकार भरी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत और नीतीश कुमार के समृद्ध बिहार के ख्वाब को अमली जामा पहनाने के लिए तमाम लोगों को साथ लेकर चलना उनकी प्राथमिकता है।

सियासत के इस खेल में कब कौन सा मुहरा किस तरफ पलट जाए, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन मंच से चली इन बयानों की तीरंदाजी ने यह जरूर साबित कर दिया कि सत्ता के गलियारों में खामोश दूरियां और जुबानी कसरत कभी थमने वाली नहीं है।