Bihar Unique Love Story: तुम ही मेरी खुदा थीं… वैलेंटाइन डे पर अमर इश्क की दास्तान, 65 लाख का मंदिर, हर रोज चढ़ता है चाय और लगता है भोग
Bihar Unique Love Story: बिहार की मिट्टी से इस वैलेंटाइन डे पर ऐसी मोहब्बत की खुशबू उठी है, जिसने हर दिल को नम कर दिया।...
Bihar Unique Love Story: बिहार की मिट्टी से इस वैलेंटाइन डे पर ऐसी मोहब्बत की खुशबू उठी है, जिसने हर दिल को नम कर दिया। पूर्वी चंपारण जिले के चकिया प्रखंड अंतर्गत भुवन छपरा गांव में एक सेवानिवृत्त पंचायत सचिव ने अपनी दिवंगत पत्नी की याद में 65 लाख रुपये की लागत से भव्य मंदिर बनवाकर प्रेम, त्याग और समर्पण की ऐसी मिसाल कायम की है, जो इश्क़ को इबादत बना देती है।
इस मंदिर में किसी देवी-देवता की मूर्ति नहीं, बल्कि उनकी जीवनसंगिनी शारदा देवी की आदमकद प्रतिमा स्थापित है। वर्ष 2022 में हार्ट अटैक से शारदा देवी का निधन हो गया था ठीक उस वक्त, जब उनके पति बालकिशुन राम की सेवानिवृत्ति में महज छह महीने बचे थे। अचानक आई इस जुदाई ने उनकी दुनिया उजाड़ दी। तन्हाई और ग़म के साए में डूबे बालकिशुन ने ठान लिया कि रिटायरमेंट पर मिली करीब 65 लाख रुपये की पूरी राशि वो अपनी पत्नी की याद को अमर करने में लगा देंगे।
करीब तीन वर्षों की मेहनत और इंतज़ार के बाद यह मंदिर बनकर तैयार हुआ। इसका उद्घाटन बिहार सरकार के पर्यटन मंत्री राजू कुमार सिंह ने किया। तब से यह मंदिर इलाके में श्रद्धा और चर्चा का केंद्र बन गया है।
बालकिशुन राम जब अपनी दास्तान सुनाते हैं, तो आवाज़ भर्रा जाती है। बचपन में पिता का साया उठ गया था। पढ़ाई छूट गई। मगर शारदा देवी ने अपने गहने बेचकर उनका दोबारा नामांकन करवाया। खुद मजदूरी की, घर संभाला और पति को आगे बढ़ने का हौसला दिया। संघर्षों की राह पर चलते-चलते बालकिशुन पंचायत सचिव बने और इस मुकाम के पीछे पत्नी का त्याग खामोश नींव की तरह खड़ा रहा।
वे बताते हैं, “वो ‘मार्कीन’ की साड़ी पहनती थीं वही कपड़ा जिसे मारवाड़ी दुकानदार दुकान में बिछाते हैं। मगर कभी शिकवा नहीं किया। मां का कर्ज़ कोई नहीं चुका सकता, लेकिन मेरी पत्नी ने मां से भी बढ़कर मेरे लिए किया।”
शारदा देवी 2007 से दिल की बीमारी, शुगर और उच्च रक्तचाप से जूझ रही थीं। इलाज चलता रहा, मगर किस्मत को कुछ और मंज़ूर था। बालकिशुन कहते हैं, “मैंने भगवान को नहीं देखा, लेकिन भगवान के रूप में मेरी पत्नी मेरे सामने थीं।”
आज भी हर सुबह-शाम मंदिर में दीप जलता है। प्रतिमा के सामने चाय का कप रखा जाता है क्योंकि उन्हें चाय पसंद थी। दोपहर का भोग और रात का भोजन भी श्रद्धा से अर्पित किया जाता है। चार बेटों और एक बेटी का यह संयुक्त परिवार आज भी उसी प्रेम की छांव में एकजुट है। मोतिहारी का यह मंदिर अब महज ईंट-पत्थर की इमारत नहीं, बल्कि मोहब्बत की वह जीवंत तस्वीर है, जहां इश्क सजदा बन गया है और यादें इबादत।
रिपोर्ट- हिमांशु कुमार